Kis Bartan Mein Dudh Ubalna Chahie: भारतीय परंपरा में किचन को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं माना गया, बल्कि इसे सेहत से जोड़कर देखा गया है. खाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे पकाने का तरीका और बर्तन होते हैं. खासकर अगर दूध की बात करें तो इसे सही बर्तन में उबालना बहुत जरूरी होता है. तो यह समझना जरूरी है कि दूध को किस बर्तन में उबालना चाहिए. हम आपको कुछ ऐसे बर्तनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारतीय किचन में काफी ज्यादा किया जाता है लेकिन इन बर्तनों में दूध को उबालना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं दूध उबालने के लिए सही बर्तन कौन सा है और कौन सा नहीं.
दूध उबालने के लिए कौन सा बर्तन सही? | Which Vessel Is Right For Boiling Milk?
कांसे के बर्तन (Bronze)- कांसे में उबाला गया दूध पचाने में आसान माना जाता है. यह वात और पित्त को बैलेंस करने में मदद करता है. कहा जाता है कि कांसे में दूध उबालने से उसमें मौजूद बैक्टीरिया कम हो सकते हैं. लेकिन ऐसे बर्तनों को साफ रखने का खास ध्यान रखना जरूरी है.
पीतल के बर्तन (Brass)- पीतल के बर्तनों में खाना पकाने को आयुर्वेद में अच्छा माना गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, पीतल में उबाला गया दूध अपने पोषक तत्व बनाए रखता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, लिवर और पाचन से जुड़ी दिक्कतों में मददगार माना जाता है. हालांकि, पीतल के बर्तनों की सही सफाई और टिन कोटिंग (कलई) जरूरी होती है.
स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel)- आजकल ज्यादातर घरों में स्टेनलेस स्टील के बर्तन इस्तेमाल होते हैं. आयुर्वेद में इसे इनर्ट यानी सामान्य धातु माना गया है. इसमें खास औषधीय गुण नहीं होते, लेकिन यह सेफ और इस्तेमाल में आसान है. इसलिए दूध उबालने के लिए यह एक सेफ ऑप्शन माना जाता है.
मिट्टी का बर्तन (Clay Pot)- गांवों में आज भी मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है. धीमी आंच पर मिट्टी के बर्तन में उबालने से दूध की पोषण क्षमता बनी रहती है. यह पेट की गैस और अपच की समस्या में भी मददगार माना जाता है.
इन बर्तनों में दूध उबालने से बचें
एल्युमिनियम- आयुर्वेद के अनुसार इसमें दूध उबालने से पोषक तत्व कम हो सकते हैं और लंबे समय में दिमाग से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.
नॉन-स्टिक- ज्यादा गर्मी में इसमें से केमिकल निकलने का खतरा रहता है.
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