'जल ही जीवन है', यह शब्द सिर्फ बोलने या फिर लिखने के लिए ही नहीं है, बल्कि पानी सेहत के लिए बहुत ही जरूरी है. हर को ऑफिस, जिम, स्कूल या कहीं बाहर जाना हो तो पानी की बोतल साथ में जरूर रखता है, क्योंकि पानी ही शरीर को दिन भर हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है. अक्सर, लोग कई तरह की पानी की बोतल खरीदते हैं, कोई कांच की, कोई प्लास्टिक की, कोई कॉपर की और कोई स्टेनलेस स्टील की बोतल खरीदता है, लेकिन क्या आपको पता है कि किस बोतल में पानी पीना सबसे अच्छा रहता है और बोतल को कब साफ किया जा सकता है.
असल में बार-बार इस्तेमाल होने वाली बोतलों में हमारे हाथों, मुंह, पानी भरने की जगहों और दूसरी जगहों से बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. बोतल के अंदर मौजूद नमी बैक्टीरिया को बढ़ने के लिए सबसे अच्छी जगह होती है. बोतल को लंबे समय तक बिना साफ किए रखा जाए, तो यह सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकती है. यही कारण है कि आयुर्वेद में तांबे यानी कॉपर की बोतल को पानी सही रखने वाले गुणों के लिए अच्छा माना जाता है. वहीं, स्टेनलेस स्टील की बोतलें अपनी मजबूती, टिकाऊपन और आसान केयर के लिए अच्छी होती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं पानी पीने के लिए कॉपर या स्टेनलेस स्टील, कौन सी बोतल अच्छी रहती है.
स्टेनलेस स्टील बोतल
चेन्नई के सवेथा मेडिकल कॉलेज के रिसर्चर्स ने 2024 में एक स्टडी की, जिसमें स्टेनलेस स्टील और PET यानी प्लास्टिक बोतलों की तुलना की गई. इस रिसर्च में पाया गया कि PET बोतलों में स्टेनलेस स्टील की बोतलों के मुकाबले कहीं ज्यादा माइक्रोब्स मौजूद थे. हालांकि, बोतल को अच्छी तरह साफ करने से दोनों तरह की बोतलों में बैक्टीरिया कम हो गए. इसका मतलब है कि स्टेनलेस स्टील की बोतल में बैक्टीरिया कम होते हैं और प्लास्टिक की बोलत में बैक्टीरिया ज्यादा हो सकते हैं. इसके अलावा बोतल की सफाई भी जरूरी है.
BCIT एनवायर्नमेंटल पब्लिक हेल्थ जर्नल की एक और स्टडी में पर्सनल स्टील बोतलों को टेस्ट किया, जिसमें पाया गया कि जिस हिस्से से हम पानी पीते हैं यानी माउथपीस के आस-पास बैक्टीरिया और गंदगी ज्यादा रहते हैं, लेकिन बोतल का हर दिन अच्छे से साफ किया जाए तो बैक्टीरिया नहीं रहते.
कॉपर की बोतल
कॉपर की बोतलों में प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि आयुर्वेद में कॉपर की बोतल में पानी पीने को अच्छा मानते हैं. इंटरनेशनल सेंटर फॉर डायरियाल डिजीज रिसर्च की एक स्टडी में ऐसे पानी का परीक्षण किया गया, जिसे जानबूझकर डायरिया फैलाने वाले छह तरह के बैक्टीरिया से दूषित किया गया था. जब इस पानी को 16 घंटे तक कमरे के तापमान पर तांबे के बर्तनों में रखा गया, तो फिर टेस्ट करने बैक्टीरिया नहीं मिले. हालांकि, तांबे की बोतल कुछ बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि पानी अपने आप ज्यादा शुद्ध हो जाता है, लेकिन हमेशा कॉपर का पानी पीने भी सही नहीं है.
कॉपर और स्टेनलेस स्टील कौन सी बोतल सही
रोजाना और दिनभर इस्तेमाल के लिए स्टेनलेस स्टील की बोतल सही है, क्योंकि यह ऑल-राउंडर है, सुरक्षित और मेंटेनेंस फ्री है, लेकिन इसे सही तरह से साफ करना जरूरी है. वहीं, तांबे की बोतल का उपयोग केवल सुबह के पानी के लिए करें और बाकी समय स्टील की बोतल का उपयोग करें.
पानी की बोतल कैसे साफ करें?
पानी की बोतल को साफ रखने के लिए सबसे आसान तरीका, रोजाना गर्म पानी और हल्के लिक्विड सोप से धोएं. अगर बोतल का मुंह पतला है, तो अंदर से अच्छी तरह रगड़ने के लिए, बोतल साफ करने वाले ब्रश का इस्तेमाल करें. ढक्कन, स्ट्रॉ और रबर सील को भी अलग करके साफ करना चाहिए. धोने के बाद, दोबारा इस्तेमाल करने से पहले बोतल को पूरी तरह सूखने दें, क्योंकि नमी से बैक्टीरिया बढ़ते हैं.
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