डॉलर के मुकाबले कितनी है भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन की करेंसी?

Currency Shock: डॉलर की बढ़ती ताकत ने एशिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है. किसी देश की करेंसी तेजी से कमजोर हुई, तो किसी ने मुश्किल हालात में भी खुद को संभालकर रखा.

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डॉलर के मुकाबले भारत के पड़ोसी देशों की करेंसी कहां है

Currency Comparison: दुनिया की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर का दबदबा सबसे ज्यादा माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार से लेकर तेल खरीदने तक ज्यादातर काम डॉलर में ही होते हैं. यही वजह है कि हर देश की करेंसी की ताकत को अक्सर डॉलर के मुकाबले मापा जाता है. एशिया के कई देशों की करेंसी पिछले कुछ समय में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं. खासकर पाकिस्तान, बांग्लादेश की करेंसी पर डॉलर मजबूत होने का बहुत फर्क पड़ा है. चीन की करेंसी भी इससे बच नहीं सकी है. हालांकि उस पर बहुत कम असर पड़ा है. चलिए आपको बताते हैं कि डॉलर के मुकाबले इन तीनों देशों की करेंसी कहां पहुंच गई है.

पाकिस्तान का रुपया क्यों कमजोर पड़ रहा है?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से इकोनॉमिक क्राइसेस से जूझ रही है. विदेशी कर्ज, बढ़ती महंगाई और पॉलिटिकल अनस्टेबिलिटी का असर सीधे वहां की करेंसी पर दिखाई देता है. फिलहाल 1 अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए करीब 278.290 पाकिस्तानी रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान का रुपया एशिया की कमजोर करेंसी में गिना जाता है.

बांग्लादेशी टका की स्थिति कैसी है?

बांग्लादेश ने पिछले कुछ सालों में टेक्सटाइल बिजनेस और निर्यात के दम पर तेजी से इकॉनोमिक ग्रोथ दिखाई है. हालांकि विश्व स्तर पर बढ़ते आर्थिक दबाव और डॉलर की मजबूती का असर वहां भी देखने को मिला है. अभी 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 122.440 बांग्लादेशी टका के आसपास है. यानी टका की स्थिति पाकिस्तान से बेहतर मानी जाती है, लेकिन डॉलर के सामने यह भी दबाव में है.

चीन का युआन सबसे ज्यादा स्थिर क्यों?

चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर में चीन की मजबूत पकड़ उसकी करेंसी को भी स्थिर बनाए रखती है. फिलहाल 1 अमेरिकी डॉलर करीब 6.797 चीनी युआन के बराबर है. यही कारण है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना में चीन की करेंसी कहीं ज्यादा मजबूत नजर आती है.

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डॉलर मजबूत होने का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?

जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के लिए आयात महंगा हो जाता है. इसका असर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है. कई देशों में महंगाई बढ़ने की एक बड़ी वजह डॉलर की मजबूती भी मानी जाती है.

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