Nobel Prize Rules: वेनेजुएला पर हमले के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार मिल गया है. इससे पहले कि आप थोड़े कंफ्यूज हों, ये साफ कर देते हैं कि ये पुरस्कार नोबेल कमेटी की तरफ से नहीं, बल्कि वेनेजुएला की ही विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने ट्रंप को गिफ्ट किया है. कुछ महीने पहले ही मचाडो को ये शांति पुरस्कार दिया गया था, जिसे अब वो ट्रंप को दे चुकी हैं. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस हो रही है और मचाडो की खूब आलोचना भी हो रही है. आइए जानते हैं कि नोबेल ट्रांसफर करने या गिफ्ट करने को लेकर नियम क्या हैं और क्या मचाडो का नोबेल पुरस्कार वापस लिया जा सकता है?
क्या है ताजा विवाद?
नोबेल प्राइज को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आया है, इससे पहले भी कई तरह के विवादों से इसका नाता रहा है. ताजा मामले की बात करें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल प्राइज अनाउंस होने से पहले पूरा माहौल तैयार कर लिया था, उनका दावा था कि उन्होंने दुनिया के कई देशों को युद्ध में जाने से रोका है, इसीलिए उन्हें नोबेल पीस प्राइज दिया जाना चाहिए. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और उनकी जगह वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को ये पुरस्कार मिल गया.
क्या है नोबेल के नियम?
nobelpeaceprize.org में दी गई जानकारी के मुताबिक नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी नोबेल को लेकर फैसले लेती है. इसने नियमों में साफ बताया गया है कि कमेटी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी कि शांति पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार मिलने के बाद वो क्या करते हैं या क्या कहते हैं, लेकिन पुरस्कार को लेकर कुछ नियम जरूर बनाए गए हैं.
- नोबेल पुरस्कार को वापस नहीं किया जा सकता है, एक बार दिए जाने के बाद कमेटी इसे वापस नहीं लेती है.
- नोबेल पुरस्कार किसी दूसरे शख्स के साथ साझा नहीं किया जा सकता है, न ही इसे किसी और को ट्रांसफर कर सकते हैं.
- एक बार नोबेल प्राइज का ऐलान होने के बाद इस फैसले को अंतिम माना जाता है और कभी बदला नहीं जाता है.
मचाडो के नोबेल प्राइज को छीना जाएगा?
नोबेल फाउंडेशन के नियमों में इस बात का कोई भी जिक्र नहीं है कि नोबेल प्राइज को वापस लिया जा सकता है. आज तक ऐसा नहीं हुआ है कि किसी से नोबेल वापस लिया गया हो. नोबेल दिए जाने के खिलाफ भी किसी तरह का कोई मुकदमा या फिर अपील नहीं की जा सकती है. क्योंकि नोबेल के नियमों में इसे ट्रांसफर करने या किसी के साथ साझा करने की मनाही है, ऐसे में भले ही मचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल प्राइज दे दिया हो, लेकिन ये शांति का नोबेल हमेशा उनके नाम पर ही रहेगा. नोबेल प्राइज के इतिहास में कभी भी ट्रंप का नाम इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के साथ नहीं जुड़ेगा.














