Resigantion rule: कोविड के बाद कॉर्पोरेट दुनिया में कॉस्ट कटिंग, परफॉर्मेंस इश्यू और री स्ट्रक्चरिंग जैसे शब्द आम हो गए हैं. इसी के साथ एक खतरनाक ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है वो है कर्मचारियों से जबरदस्ती इस्तीफा दिलवाना. एम्पलॉई को अपने काम पर भरोसा हो, फिर भी कंपनी उसके परफोर्मेंस को आधार बना कर या बिहेवियर को आधार बनाकर रिजाइन मांग लेती हैं. कई बार कर्मचारी डर, दबाव या करियर खराब होने की आशंका में चुपचाप रिजाइन दे देते हैं. जबकि कानून उन्हें ऐसा करने से बचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सवाल यही है कि क्या कोई कंपनी आपसे कभी भी रिजाइन मांग सकती है? चलिए जानते हैं इसका जवाब.
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क्या कंपनी आपसे जबरन रिजाइन मांग सकती है?
सीधा जवाब है, नहीं. भारतीय कानून के अनुसार इस्तीफा पूरी तरह वॉलेंटियरली दिया गया होना चाहिए. अगर कंपनी दबाव, धमकी, डर या मेंटल प्रेशर के जरिये आपसे रिजाइन लेती है. तो ये इललीगल है. अदालतें इसे कंस्ट्रक्टिव टर्मिनेशन मानती हैं. यानी कंपनी ने हालात ऐसे बना दिए कि कर्मचारी मजबूरी में नौकरी छोड़ दे.
जबरदस्ती इस्तीफा लेने के आम तरीके
कई बार दबाव खुलकर नहीं डाला जाता. जैसे-
• कहा जाए कि रिजाइन नहीं दिया तो डिसिप्लिनरी कार्रवाई होगी
• करियर खराब करने की धमकी
• नामुमकिन टारगेट या जरूरत से ज्यादा काम
• इनस्लटिंग बिहेवियर या बार बार मेंटल प्रेशर
• HR की नेगेटिव सर्विस रिकॉर्ड की वॉर्निंग
रिजाइन का दबाव हो तो क्या करें?
सबसे पहले शांत रहें. कोई भी डॉक्यूमेंट जल्दबाजी में साइन न करें.
• ईमेल, मैसेज और बातचीत के सबूत संभालें
• HR या ग्रिवेंस सेल को लिखित शिकायत करें
• लेबर लॉ एक्सपर्ट या वकील से सलाह लें
यही कदम आगे चलकर आपको प्रोटेक्ट करता है.
अगर आपने दबाव में रिजाइन दे दिया हो तो?
कानून अभी भी आपके साथ है. नोटिस पीरियड में इस्तीफा वापस लिया जा सकता है. आप कंपनी को लीगल नोटिस भेज सकते हैं. लेबर कमिश्नर से शिकायत कर सकते हैं या जरूरत पड़ने पर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं.
क्या सैलरी, PF और ग्रेच्युटी मिलेगी?
हां, बिल्कुल मिलेगा. जबरन लिया गया इस्तीफा अवैध टर्मिनेशन माना जाता है. ऐसे मामलों में वेतन, PF, बोनस और ग्रेच्युटी आपका कानूनी हक है. गुजरात हाई कोर्ट ने 2022 में साफ कहा कि जबरन इस्तीफे के बावजूद कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए.