2026 की सबसे ज्यादा स्ट्रेस देने वाली नौकरियां, क्या आपकी जॉब भी इस लिस्ट में है?

एक नई स्टडी के मुताबिक, 2026 में कई नौकरियां बहुत ज्यादा स्ट्रेस देने वाली बन चुकी हैं. रिसर्च में सामने आया कि लंबे वर्किंग आवर्स, स्टाफ की कमी, जॉब इनसिक्योरिटी और कम रिकवरी टाइम कर्मचारियों को बर्नआउट की ओर धकेल रहे हैं.

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एक नई स्टडी ने 2026 की सबसे ज्यादा हाई-प्रेशर नौकरियों की लिस्ट जारी की है.

Most Stressful Jobs in 2026: अगर ऑफिस से लौटते वक्त अक्सर ऐसा लगता है कि शरीर थक चुका है, दिमाग काम करना बंद कर देता है और अगली सुबह उठने का मन नहीं करता, तो आप अकेले नहीं हैं. दरअसल, स्ट्रेस और बर्नआउट सिर्फ पर्सनल प्रॉब्लम नहीं, बल्कि एक सिस्टम की समस्या बन चुकी है. स्टेस और एनर्जी मैनेजमेंट ऐप Welltory की एक नई स्टडी ने 2026 की सबसे ज्यादा हाई-प्रेशर नौकरियों की लिस्ट जारी की है. यह स्टडी अमेरिका के डेटा पर आधारित है, लेकिन इसके नतीजे भारत समेत पूरी दुनिया के वर्क कल्चर को आईना दिखाते हैं. आइए जानते हैं इस साल सबसे ज्यादा स्टेस देने वाली नौकरियां कौन सी हैं.

यह स्टडी कैसे की गई

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेलटोरी (Welltory) की रिसर्च टीम ने 2025 के डेटा का एनालिसिस किया. इस स्टडी में दुनिया भर के 1.6 करोड़ (16 मिलियन) यूजर्स का डेटा शामिल था, जिसे अलग-अलग इंडस्ट्री के हिसाब से तुलना करके समझा गया. रिसर्च को फेयर बनाने के लिए एक खास तरीका अपनाया गया, जिसे मिनिमम-मैक्सिमम नॉर्मलाइजेशन कहते हैं. आसान शब्दों में कहें तो हर फैक्टर को 1 से 100 के स्केल पर मापा गया, ताकि स्ट्रेस का सही लेवल सामने आ सके. इसमें 7 फैक्टर्स को मिलाकर स्ट्रेस स्कोर तैयार किया गया.

जॉब का स्ट्रेस फैक्टर्स

1. हफ्ते में कितने घंटे काम करना पड़ता है

2. कंपनी में खाली वैकेंसी कितनी हैं

3. काम के दौरान चोट या बीमारी का खतरा

4. सैलरी और मेहनत का बैलेंस

5. लेऑफ और नौकरी जाने का डर

6. कर्मचारियों का बार-बार नौकरी छोड़ना

7. बर्नआउट यानी मानसिक थकान और मोटिवेशन की कमी

2026 की सबसे ज्यादा स्ट्रेस देने वाली इंडस्ट्री

1. हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म सेक्टर का स्ट्रेस स्कोर सबसे ज्यादा 66 है. होटल, रेस्टोरेंट और टूरिज्म से जुड़ा यह सेक्टर 2026 में सबसे ज्यादा तनाव देने वाला माना गया है.

2. प्रोफेशनल और बिजनेस सर्विसेज का स्ट्रेस स्कोर 56 है. कंसल्टिंग, कॉर्पोरेट सर्विसेज और क्लाइंट-ड्रिवन नौकरियों में लगातार डेडलाइन और परफॉर्मेंस प्रेशर रहता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है.

3. ट्रांसपोर्टेशन और वेयरहाउसिंग इंडस्ट्री का स्ट्रेस स्कोर 53 है. इस सेक्टर में लंबी शिफ्ट, शारीरिक थकान और समय पर डिलीवरी का दबाव कर्मचारियों की एनर्जी तेजी से खत्म कर देता है.

4. माइनिंग और लॉगिंग सेक्टर का स्ट्रेस स्कोर 50 है. यहां काम के दौरान फिजिकल रिस्क और सेफ्टी से जुड़ी चिंताएं सबसे बड़ा स्ट्रेस फैक्टर हैं, क्योंकि हर वक्त सतर्क रहना जरूरी होता है.

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5. प्राइवेट एजुकेशन और हेल्थ सर्विसेज को 46 का स्ट्रेस स्कोर दिया गया है. टीचर्स और हेल्थ वर्कर्स पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रिकवरी और आराम का समय बहुत सीमित होता है.

6. टेक और मीडिया इंडस्ट्री का स्ट्रेस स्कोर 43 है. लगातार स्क्रीन टाइम, नोटिफिकेशन और इनफॉर्मेशन ओवरलोड दिमाग को थका देता है, जिससे मानसिक तनाव बना रहता है.

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7. कंस्ट्रक्शन सेक्टर का स्ट्रेस स्कोर 43 है. फिजिकल मेहनत, सेफ्टी रिस्क और जॉब सिक्योरिटी को लेकर चिंता इस इंडस्ट्री को स्ट्रेसफुल बनाती है.

8. रिटेल ट्रेड इंडस्ट्री का स्ट्रेस स्कोर 43 है. लंबी शिफ्ट, कस्टमर प्रेशर और टारगेट-ड्रिवन काम कर्मचारियों को मानसिक रूप से थका देता है.

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9. यूटिलिटी सर्विसेज सेक्टर को 43 का स्ट्रेस स्कोर दिया गया है. इमरजेंसी-बेस्ड काम और बड़ी जिम्मेदारियों का दबाव हर समय बना रहता है, जिससे तनाव का स्तर हाई रहता है.

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