NDA Salary : रक्षा सेवाओं में अफसर बनने की चाह रखने वाले युवा अक्सर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की राह चुनते हैं. 12वीं के बाद UPSC NDA परीक्षा, SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट पास करने वाले उम्मीदवारों को कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. इस दौरान सबसे आम सवाल होता है कि NDA कैडेट्स को कितनी सैलरी मिलती है? दरअसल, ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को सैलरी नहीं, बल्कि तय स्टाइपेंड मिलता है. वहीं कमीशन मिलने के बाद उनकी सैलरी में बड़ा बदलाव आता है और बेसिक पे के साथ मिलिट्री सर्विस पे (MSP) समेत कई अलाउंस जुड़ते हैं. आइए जानते हैं NDA कैडेट से लेकर लेफ्टिनेंट तक की सैलरी का पूरा गणित...
ट्रेनिंग के दौरान कितनी स्टाइपेंड मिलती है?
उपलब्ध सरकारी सैलरी स्ट्रक्चर के अनुसार, प्री-कमीशन ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को हर महीने 56,100 रुपए स्टाइपेंड मिलती है. यह डिफेंस पे मैट्रिक्स के लेवल-10 से जुड़ी राशि है. हालांकि, कैडेट के अकाउंट में पूरी रकम इन-हैंड के तौर पर नहीं आती. इंश्योरेंस और दूसरी तय चीजों में कटौती के बाद यह रकम कम हो सकती है.
दरअसल, कैडेट्स के लिए इंश्योरेंस बहुत जरूरी होता है. आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF) जैसी योजनाओं के जरिए तय रकम से निर्धारित योगदान लिया जाता है. इसके अलावा यूनीफॉर्म, लॉन्ड्री, हेयरकट, खेल और दूसरी सुविधाओं से जुड़े खर्च भी हो सकते हैं. इसलिए 56,100 रुपए की पूरी राशि को इन-हैंड सैलरी समझना सही नहीं है.
रहने-खाने और ट्रेनिंग का खर्च कौन उठाता है?
NDA की ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को कई जरूरी सुविधाएं संस्थान के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं. इनमें रहने, भोजन, मेडिकल सुविधाओं, ट्रेनिंग और मिलिट्री किट जैसी जरूरी व्यवस्थाएं शामिल होती हैं. कैडेट्स को इन सभी खर्चों का पूरा भुगतान अपनी जेब से नहीं करना पड़ता है.
अफसर बनते ही कितनी हो जाती है सैलरी?
ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने और संबंधित मिलिट्री एकेडमी से कमीशन मिलने के बाद कैंडिडेट अधिकारी बनता है. सेना में शुरुआती अधिकारी रैंक लेफ्टिनेंट होती है, जबकि नौसेना और वायुसेना में संबंधित शुरुआती अधिकारी रैंक अलग होती है. लेफ्टिनेंट के लिए पे लेवल-10 में बेसिक पे 56,100 से लेकर 1,77,500 रुपए प्रति महीने तक है. इसके अलावा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) और पोस्टिंग, क्षेत्र तथा पात्रता के आधार पर कई अलाउंसेज भी मिल सकते हैं. इसलिए कुल मंथली पैकेज केवल बेसिक पे तक सीमित नहीं रहता.
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