AI बदलेगा IT का खेल: नंदन नीलकणी ने गिनाईं 4 नौकरियां जो घटेंगी, 5 नए काम जिनकी मांग बढ़ेगी

Investor Day 2026 में इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकणी ने कहा कि AI अब सिर्फ एक नया टूल नहीं है. यह कंपनियों के काम करने के तरीके को जड़ से बदल रहा है. अब सिर्फ कोड लिखना ही लक्ष्य नहीं रहेगा, असली बात होगी AI से सही तरीके से काम निकलवाना.

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AI के कारण कुछ काम या नौकरियां घट सकती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ नई भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है.

AI Impact on Jobs : AI को लेकर जितनी चर्चा हो रही है, उतना ही भ्रम भी है. क्या नौकरियां खत्म होंगी? क्या कोड लिखने वालों की जरूरत कम हो जाएगी? क्या IT सेक्टर में बड़े बदलाव आने वाले हैं? इन सवालों के बीच इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकणी ने साफ संकेत दिया है कि बदलाव तय है. लेकिन तस्वीर सिर्फ डर वाली नहीं है. कुछ काम कम होंगे, तो कई नए काम तेजी से बढ़ेंगे भी. Investor Day 2026 में उन्होंने कहा कि AI अब सिर्फ एक नया टूल नहीं है. यह कंपनियों के काम करने के तरीके को जड़ से बदल रहा है. अब सिर्फ कोड लिखना ही लक्ष्य नहीं रहेगा, असली बात होगी AI से सही तरीके से काम निकलवाना.

किन IT नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है

नीलकणी के मुताबिक जैसे-जैसे AI रोज के काम संभाल रहा है, कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत घट सकती है. इनमें शामिल हैं

  • फ्रंट एंड वेब डेवलपर्स
  • QA टेस्टर्स
  • IT सपोर्ट स्पेशलिस्ट
  • पारंपरिक ब्लॉकचेन से जुड़े काम
     

आज कई AI टूल कुछ ही सेकंड में इंटरफेस तैयार कर लेते हैं. ऑटोमेशन सिस्टम शुरुआती स्तर पर ही बग पकड़ लेते हैं. चैटबॉट और खुद सुधार करने वाले सिस्टम सामान्य दिक्कतें संभाल लेते हैं. ऐसे में इन भूमिकाओं में पहले जैसा काम नहीं बचेगा.

कौन से नए काम तेजी से बढ़ेंगे

AI के कारण कुछ काम या नौकरियां घट सकती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ नई भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है. इनमें प्रमुख हैं-

  • AI engineers
  • AI forensic analysts (AI में गड़बड़ी पकड़ने वाले विशेषज्ञ)
  • Forward-deployed engineers (सीधे क्लाइंट के साथ काम करने वाले)
  • AI leads (AI जानकारों की टीम को लीड करने वाले)
  • Data annotators (डेटा को सही तरीके से लेबल करने वाले एक्सपर्ट)

मतलब साफ है, नौकरियां खत्म नहीं हो रहीं, उनका रूप बदल रहा है. जो लोग आज टेस्टिंग या साधारण डेवलपमेंट में हैं, उन्हें आगे बढ़कर इन नए कामों के लिए खुद को तैयार करना होगा. कंपनियों को भी अपनी टीमों को नए कौशल सिखाने होंगे.


असली चुनौती कहां है

नीलकणी ने एक अहम बात पर जोर दिया. नया कोड बनाना अब उतना मुश्किल नहीं रहा. AI नए प्रोजेक्ट के लिए जल्दी कोड बना सकता है. असली परेशानी पुराने सिस्टम में है. कई कंपनियां ऐसे पुराने सिस्टम पर काम कर रही हैं, जिनमें डेटा अलग-अलग जगह फंसा है और बहुत कुछ साफ तौर पर दर्ज नहीं है. इन्हें बदलना ऐसा है जैसे लोग घर में रह रहे हों और उसी समय पुराने घर की मरम्मत करनी पड़े. नया घर बनाना आसान है, पुराना सुधारना मुश्किल.

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AI के नाम पर अंधी दौड़ से बचने की सलाह

उन्होंने यह भी साफ किया कि AI जो भी बना दे, वह हमेशा उपयोगी हो, यह जरूरी नहीं. अगर साफ नियम, जांच और जवाबदेही न हो तो AI का नतीजा बेकार भी हो सकता है.तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसे सही तरीके से लागू करना आसान नहीं. कंपनियों को अपने काम का तरीका बदलना होगा,  लोगों को फिर से प्रशिक्षित करना होगा और डेटा को ठीक ढंग से व्यवस्थित करना होगा.

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