JSSC-CGL विवाद: 'अगर परीक्षा गलत थी तो जांच के बाद आगे क्यों बढ़ी?' सरकार के फैसले पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर चयनित अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा को रद्द करना उन हजारों उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से सफलता हासिल की है.

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एनडीटीवी ने करीब 10 चयनित अभ्यर्थियों से बातचीत की. बातचीत में लगभग सभी अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया एक जैसी रही. उ

JSSC CGL Cancellation : जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल 48 पेज के जवाब के बाद सिलेक्टेड अभ्यार्थी ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं. सरकार ने अपने जवाब में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए कहा है कि सही और गलत तरीके से सिलेक्टेड अभ्यार्थी को अलग करना मुश्किल है, इसलिए पूरी परीक्षा रद्द करना जनहित में उचित है.

‘जब जांच के बाद परीक्षा सही थी तो अब पूरी परीक्षा दूषित कैसे?'

एनडीटीवी से बातचीत में चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट उनके साथ न्याय करेगा. अभ्यर्थियों का कहना है कि JSSC-CGL परीक्षा पहले भी विवादों में रही थी और असफल अभ्यर्थियों की शिकायतों के बाद जांच की प्रक्रिया हुई थी. उनका सवाल है कि अगर उस समय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद परीक्षा और नियुक्तियों को आगे बढ़ाया गया, तो अब पूरी परीक्षा को ही दूषित बताया जा रहा है.

बताकर रद्द करने का आधार क्या है?

चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक इस परीक्षा में करीब 6 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और लगभग 3 लाख 5 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 26,398 अभ्यर्थी सफल हुए, जबकि करीब 2 हजार अभ्यर्थियों का चयन नियुक्ति के लिए हुआ. अभ्यर्थियों का दावा है कि सिलेक्टेड लोगों में करीब 600 आदिवासी अभ्यर्थी हैं और लगभग 96 फीसदी चयनित अभ्यर्थी झारखंड के ही हैं. ऐसे में पूरी प्रक्रिया रद्द होने से उन अभ्यर्थियों पर भी असर पड़ेगा, जिन्होंने अपनी मेहनत और निर्धारित प्रक्रिया के जरिए परीक्षा पास की है.

‘दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोषों का भविष्य क्यों प्रभावित हो?'

एनडीटीवी ने करीब 10 चयनित अभ्यर्थियों से बातचीत की. बातचीत में लगभग सभी अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया एक जैसी रही. उनका कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिन अभ्यर्थियों का चयन निष्पक्ष तरीके से हुआ है, उन्हें इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े? अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार के जवाब में सही और गलत अभ्यर्थियों की पहचान मुश्किल होने की बात कही गई है, लेकिन उनके लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक मुश्किल नहीं बल्कि उनके वर्षों के भविष्य का सवाल है. चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्हें सरकार के फैसले से निराशा है, लेकिन न्यायालय पर उनका पूरा भरोसा है.

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JSSC-CGL मामले में हाईकोर्ट ने 18 सितंबर की सुनवाई के बाद चयनित अभ्यर्थियों को मिली अंतरिम राहत जारी रखी है और अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है. फिलहाल राहत प्राप्त चयनित अभ्यर्थी अपने पद पर काम करते रहेंगे.

चयनित अभ्यर्थियों के सामने बड़ा सवाल

सरकार की दलील जहां परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाती है, वहीं चयनित अभ्यर्थियों का जोर इस बात पर है कि गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से न देखा जाए. अब इस पूरे विवाद में हाईकोर्ट के सामने सरकार के तर्क और चयनित अभ्यर्थियों की आपत्तियां दोनों हैं. अदालत के अगले आदेश से यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियों और परीक्षा के भविष्य को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है.

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