IIT Failure Success Story: क्या एक एग्जाम आपकी पूरी लाइफ तय कर देता है. अगर जवाब नहीं है, तो वीराज गड्डा (Veeraj Gadda) की कहानी आपको अंदर तक छू जाएगी. एक ऐसा छात्र जिसे न IIT में एडमिशन मिला, न ही कैंपस प्लेसमेंट, लेकिन आज वही लड़का अमेरिका में अपने घर का मालिक है. मुंबई के दादर में एक मिडिल क्लास फैमिली में पले-बढ़े वीराज ने बचपन से ही स्ट्रगल देखा. उनके पिता एक छोटी-सी फर्नीचर दुकान चलाते थे, लेकिन सपने अपने तीनों बच्चों को पोस्टग्रेजुएट कराना था. सुबह से रात तक मेहनत करने वाले पिता की यही ज़िद वीराज के अंदर गहराई से बैठ गई और आज वह यूएस में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं.
IIT नहीं निकला, प्लेसमेंट भी नहींIIT एंट्रेंस क्लियर न कर पाना वीराज के लिए पहला बड़ा झटका था, लेकिन असली चोट तब लगी जब इंजीनियरिंग के दौरान उनके सभी दोस्त कैंपस प्लेसमेंट में सेलेक्ट हो गए और उन्हें एक भी ऑफर नहीं मिला. पहली बार उन्हें लगा कि शायद वो परिवार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए. ये वही पल था जब कई लोग हार मान लेते हैं, लेकिन वीराज कुछ अलग करने वाले थे.
उनके माता-पिता ने 40 लाख रुपये का भारी लोन लेकर उन्हें अमेरिका में मास्टर्स के लिए भेजा. ये उनकी फैमिली के लिए काफी बड़ा रिस्क था. अमेरिका पहुंचकर भी वीराज के लिए हालात आसान नहीं थे. पहले सेमेस्टर में नंबर एवरेज रहे, टेक्निकल स्किल्स कुछ खास नहीं थे. कॉन्फिडेंस डगमगाने लगा. एक दिन उन्होंने कुछ क्लासमेट्स को ये कहते सुना कि उनके कम ग्रेड्स और कमजोर प्रोफाइल के कारण उन्हें नौकरी मिलना मुश्किल है. वो बात उनके दिल में चुभ गई.
90 दिन की वीजा डेडलाइन और लाइफ का टर्निंग पॉइंटअमेरिका में पढ़ाई पूरी होने के बाद वीराज का वीजा खत्म होने में सिर्फ 90 दिन बचे थे. नौकरी नहीं, कोई ऑफर भी नहीं और कुछ समय भी नहीं आ रहा था, लेकिन उन्होंने फैसला किया या तो हालात बदलेंगे या खुद बदल जाएंगे. उन्होंने हर दिन 14-14 घंटे पढ़ाई करनी शुरू की, सैकड़ों जॉब एप्लिकेशन डालीं, लगातार रिजेक्शन झेले. हर 'नहीं' के बाद खुद से एक और कोशिश करने को कहा. 71वें दिन वो न्यूयॉर्क इंटरव्यू देने पहुंचे. चार राउंड के बाद उन्हें ऑफर मिला. वही ऑफर जिसने सब बदल दिया.
आज अमेरिका में मैनेजर और अपने घर के मालिक
आज वीराज एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर हैं. उन्होंने पूरा एजुकेशन लोन चुका दिया है. इलिनोइस में अपना घर खरीदा है, वो सपना जो कभी उनके लिए इंपॉसिबल सा लगता था. वह बताते हैं कि उनके लिए सबसे इमोशनल पल तब था, जब उन्होंने अपने माता-पिता को अमेरिका बुलाकर अपने घर में स्वागत किया. अब वीराज सिर्फ अपने लिए नहीं जीते. वह उन छात्रों को मेंटर करते हैं, जो विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं लेकिन एग्जाम, पैसे, रिजेक्शन या असफलता से डरते हैं. उनका मानना है कि सफलता तब और खूबसूरत बनती है, जब आप उसे दूसरों के साथ शेयर करते हैं.
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