इंडियन एयर फोर्स में कैसे बनें गरुण कमांडो, जानिए यहां पूरी प्रोसेस

How To Become A Garud Commando : भारतीय वायुसेना में गरुण कमांडो बनने के लिए सबसे पहले IAF में भर्ती होना जरूरी है. इसके बाद कैंडिडेट्स को ऑफिसर या एयरमैन के तौर पर सेलेक्ट होकर, कठिन फिजिकल, मेडिकल और स्पेशल ट्रेनिंग से गुजरना होता है.

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IAF मेडिकल स्टैंडर्ड्स के अनुसार मेडिकल फिटनेस होना अनिवार्य.

Garud Commando Selection Process: क्या इंडियन एयरफोर्स के जवानों को देखकर आपका भी सीना चौड़ा हो जाता है, IAF में गरुण कमांडो बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं. अगर हां, तो यह आर्टिकल आपके लिए है. दरअसल, किसी भी देश की सुरक्षा में एयरफोर्स का योगदान बेहद अहम होता है. गरुण कमांडो बनना सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का सबसे सम्मानजनक और रोमांचक तरीका है. ये जवान आतंकवाद विरोधी मिशन, रेस्क्यू ऑपरेशंस और एयरफोर्स के एसेट्स की सुरक्षा जैसे खतरनाक ऑपरेशन में हिस्सा लेते हैं. इस आर्टिकल में जानिए गरुण कमांडो बनने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी योग्यता, ट्रेनिंग और करियर के अवसरों के बारे में, ताकि आप तैयार होकर इस चुनौती से भरे और सम्मानजनक मिशन का हिस्सा बन सकें...

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गरुण कमांडो कौन होते हैं

गरुण कमांडो भारतीय वायुसेना की स्पेशल फोर्स यूनिट हैं, जिन्हें देश के सबसे कठिन और जोखिम भरे मिशनों के लिए तैयार किया जाता है. ये स्पेशल ऑपरेशन, एयर स्ट्राइक, रिस्क मिशन और आतंकवाद विरोधी मिशनों में हिस्सा लेते हैं. गरुण कमांडो बनने के बाद आप एलीट टास्क फोर्स का हिस्सा बन जाते हैं और आपकी ट्रेनिंग दुनिया के सबसे कठिन कमांडो ट्रेनिंग प्रोग्राम में से एक माना जाता है.

गरुण कमांडो का काम क्या होता है

1. गरुण कमांडो का मुख्य काम एयरफोर्स बेस की सुरक्षा और रक्षा करना है.

2. रडार और सैन्य संपत्तियों को सुरक्षित रखते हैं.

3. इमरजेंसी में काउंटर अटैक और बचाव अभियान करते हैं.

4. आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और रेस्क्यू मिशन में योगदान देते हैं.

5. इंटेलिजेंस और स्पेशल ऑपरेशन के जरिए दुश्मन की जानकारी जमा करते हैं.

6. दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने की ट्रेनिंग लेते हैं.

गरुण कमांडो बनने की ट्रेनिंग कैसी होती है

गरुण कमांडो बनने के लिए उम्मीदवारों को 3 साल तक कठिन ट्रेनिंग से गुजरना होता है. इस दौरान उनकी क्षमता और साहस को जांचा जाता है. उन्हें खतरनाक इलाकों, जंगलों और पहाड़ों में सर्वाइव करना, कठिन परिस्थितियों में मेंटली और फिजिकली खुद को तैयार करना होता है. उनकी NSG, MARCOS और पैरा कमांडो के स्तर की स्पेशल ट्रेनिंग होती है, जो कैंडिडेट्स इस ट्रेनिंग में सफल होते हैं, उन्हें ही गरुण कमांडो के पदों पर नियुक्त किया जाता है.

गरुण कमांडो ट्रेनिंग के दौरान क्या सीखते हैं

फ्री फॉल पैराशूटिंग

एयरबोर्न ऑपरेशन

हाई-इंटेंसिटी कमांडो ड्रिल

सर्वाइवल स्किल्स (जंगल, पहाड़, पानी)

हथियार और स्नाइपिंग ट्रेनिंग

स्ट्राइक मिशन और एयरक्राफ्ट रेस्क्यू ऑपरेशन

गरुण कमांडो बनने के लिए योग्यता

गरुण कमांडो बनने के लिए आपको IAF में ऑफिसर या एयरमैन के तौर पर सेलेक्शन होना जरूरी है. इसके अलावा इससे जुड़े सभी स्टैंडर्ड पूरे करने पड़ते हैं.

1. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन Educational Qualification)

कम से कम 12वीं पास या ग्रेजुएट होना जरूरी है.

IAF एंट्रेंस परीक्षा क्लियर करना अनिवार्य

2. आयु सीमा (Age Limit)

जनरल कैटेगरी के लिए 18–25 साल

रिजर्वेशन कैटेगरी के लिए नियम अलग हो सकते हैं

3. शारीरिक स्टैंडर्ड (Physical Standards)

पुरुष कैंडिडेट की हाइट 165 सेमी, महिला कैंडिडेट की 157 सेमी

वजन BMI के अनुसार होना चाहिए

फिजिकल फिटनेस टेस्ट (PFT) पास होना जरूरी

4. हेल्थ और मेडिकल फिटनेस (Health & Medical Fitness)

कोई गंभीर बीमारी या चोट नहीं होना चाहिए

IAF मेडिकल स्टैंडर्ड्स के अनुसार मेडिकल फिटनेस होना अनिवार्य

भारतीय वायुसेना में गरुण कमांडो का सेलेक्शन प्रोसेस

1. एयरमैन (Non-Commissioned Entry)

देशभर में एयरमैन सेलेक्शन केंद्रों के जरिए होता है. इसमें एग्जाम पास करने के बाद फिजिकल टेस्ट होता है, जिसमें रनिंग, पुश-अप्स, सिट-अप्स शामिल हैं. इसके बाद मानसिक क्षमता और इंटरव्यू क्लियर करना पड़ता है.

2. कमीशन अधिकारी (Commissioned Officer)

कमीशन प्राप्त अधिकारियों के लिए भी कठिन सेलेक्शन प्रोसेस होती है. इसमें कैंडिडेट्स की फिजिकल, मेंटल और लीडरशिप को देखा जाता है. योग्य अभ्यर्थियों को ही गरुण कमांडो ट्रेनिंग के लिए चुना जाता है.

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