गाय चराओ और पैसे कमाओ, इस राज्य ने निकाली ग्वाला की नौकरी; इतनी मिलेगी सैलरी

Gaon Gwala Yojana Rajasthan: राजस्थान की भजनलाल सरकार में शिक्षा और पंचायती राज्य मंत्री मदन दिलावर ने गोवंश के संरक्षण के लिए एक योजना की शुरुआत की, जिसका नाम है ‘गांव ग्वाला योजना’.  इस योजना में अब गांव में गाय चराने वाले लोगों को हर महीने 10 हजार रुपये दिए जाएंगे.

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Gaon Gwala Yojana Rajasthan
NDTV

Gaon Gwala Yojana, Rajasthan: अगर आप घर पर खाली बैठे हैं और आपके पास कुछ काम नहीं है तो आपको मिल रहा है हर महीने 10000 रुपये कमाने का मौका. इसके लिए आपको किसी डिग्री की जरूरत भी नहीं है और कुछ करना भी नहीं है बस कुछ गायों को सुबह चराने लेकर जाना है और शाम को वापस ले आना है. राजस्थान की भजनलाल सरकार में शिक्षा और पंचायती राज्य मंत्री मदन दिलावर ने गोवंश के संरक्षण के लिए एक योजना शुरू की है , जिसका नाम है ‘गांव ग्वाला योजना'.  इस योजना में अब गांव में गाय चराने वाले लोगों को हर महीने 10 हजार रुपये दिए जाएंगे.  इस योजना की शुरुआत कोटा जिले के रामगंजमंडी इलाके से की गई है. 

गांव ग्वाला योजना की हुई शुरुआत 

राजस्थान के रामगंजमंडी विधानसभा के खेड़ली गांव (चेचट) से गांव ग्वाला योजना की शुरुआत की गई. मंत्री मदन दिलावर ने नवनियुक्त 14 गांव ग्वालों का मंच पर माला और साफा पहनाकर शाही स्वागत किया. श्रीराम स्नेही संप्रदाय (शाहपुरा पीठ) के पूज्य जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज भी इस अवसर पर वहां मौजूद थे और उन्होनें इन सभी ग्वालों को आशीर्वाद दिया.

शुरुआत में 14 गांवों में एक-एक ग्वाला रखा गया है. सरकार का कहना है कि पहले गांवों में लोग मिलकर गाय चराते थे, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई है. कई जगह गायें सड़क पर घूमती रहती हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए यह योजना लाई गई है. 

क्या काम करेगा गांव ग्वाला?

जिस व्यक्ति को गांव ग्वाला बनाया जाएगा, उसका काम सुबह गांव की गायों को इकट्ठा करना होगा. वह उन्हें चरने की जमीन यानी गोचर भूमि तक ले जाएगा. पूरे दिन गायों का ध्यान रखेगा और शाम को उन्हें वापस उनके मालिकों के घर तक छोड़ देगा. सरकार का कहना है कि लगभग 70 गायों पर एक ग्वाला रखा जाएगा. अगर किसी गांव में गायों की संख्या ज्यादा है, तो दो या तीन ग्वाले भी रखे जा सकते हैं.

सैलरी कैसे मिलेगी?

हर ग्वाले को 10 हजार रुपये हर महीने दिए जाएंगे. यह पैसा सीधे सरकार नहीं देगी. इसके लिए गांव के भामाशाह यानी दान देने वाले लोग मदद करेंगे. उनके सहयोग से ही ग्वालों को भुगतान किया जाएगा. यानी गांव के लोग मिलकर इस योजना को चलाएंगे. सरकार का कहना है कि इससे गायों की देखभाल बेहतर होगी. सड़क पर घूमती गायों की समस्या कम होगी. साथ ही गांव के लोगों को काम भी मिलेगा.

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