- झारखंड के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में नवजात की मृत्यु के बाद शव प्लास्टिक डब्बे में दिया गया
- अस्पताल प्रबंधन ने शव घर पहुंचाने के लिए न तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई न कोई अन्य सहायता दी
- परिजन और ग्रामीण अस्पताल की लापरवाही और गरीब मरीजों के साथ असम्मानजनक व्यवहार को लेकर नाराज हैं
झारखण्ड के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल से शर्मनाक तस्वीर सामने आई है.यहां स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही की इंतेहा करते हुए एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों को उसका शव प्लास्टिक के डब्बे में भरकर दे दिया. और तो और अस्पताल की ओर से न एंबुलेंस मिली, न कोई मदद,अंत में थी सिर्फ थी लापरवाही.
कहां की घटना?
करीकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव के रामकृष्ण हेम्ब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए इसी अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता ने बच्चे को जन्म दिया,लेकिन कुछ ही देर में नवजात की मौत हो गई.परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने कोई सहायता नहीं की न शव घर पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस दी,न कोई वैकल्पिक व्यवस्था. मजबूरी में रामकृष्ण ने बच्चे का शव डब्बे में रखकर गांव पहुंचा.
गांववाले नाराज
ग्रामीणों कहना है की गांव के गरीब मरीजों के साथ अस्पतालों में हमेशा सौतेला व्यवहार होता है.अगर इच्छा होती तो एंबुलेंस से शव और परिजनों को घर पहुंचा सकते थे.यह घटना कोल्हान प्रमंडल के चाईबासा मुख्यालय से आई है,जहां खनिज संपदा से अरबों कमाई होती है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं जंग लगी साइकिल जैसी.हाल के दिनों में थैलेसीमिया मरीज को HIV संक्रमित खून चढ़ाने का कांड हो चुका है,तो नवजातों के शव झोले-डब्बों में लादे जा रहे हैं. अब सवाल यह कि आखिर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था कब सुधरेगी? गरीबों-आदिवासियों को सम्मानजनक इलाज कब मिलेगा?














