- वारा पशुओं की समस्या और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गोमूत्र खरीदने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है
- बुलंदशहर में फिलहाल इस स्कीम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है.
- ग्रामीण महिलाओं को गोमूत्र संग्रहण में सहयोग के लिए प्रति लीटर दो रुपये कमीशन दिया जा रहा है
उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या को दूर करने और किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से योगी सरकार गोमूत्र खरीदेगी. सरकार ने उसके लिए पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है. पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो फिर पूरे प्रदेश में किसानों से गोमूत्र खरीदने के लिए बाकायदा नीति बनेगी और उस नीति के आधार पर काम किया जाएगा. सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष के सरकार पर तंज कसा है. सपा ने कहा है कि भाजपा चुनाव के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए स्कैम कर रही है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि गौमूत्र खरीदने की नीति से गो संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.
इसके साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती के लिहाज़ से भी लाभ होगा. सरकार का ये पायलट प्रोजेक्ट बुलंदशहर में शुरू किया गया है. फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन यानी एफपीओ के ज़रिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमूत्र की खरीद शुरू की गई है. किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है. राज्य सरकार इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस मॉडल को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी में है. इससे गोवंश पालने वाले परिवारों को दूध के साथ गोमूत्र से भी अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सकेगा.
इसके अलावा जो पशु दूध नहीं देते. उन्हें आवारा छोड़ने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई जा सकती है. बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में डॉ प्रवीण के नेतृत्व में एफपीओ के जरिए शुरू हुए इस प्रयोग से आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है. पायलट प्रोजेक्ट में शामिल गांवों में गोमूत्र इकट्ठा करने के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्र बनाए गए हैं. वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है. आगे खरीद की दर बढ़ाकर इसे 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना है. गोमूत्र को रखने के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता के टैंक लगाए गए हैं. इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता है.
इससे खास तौर पर महिलाओं को जोड़ना आसान हुआ है. गोमूत्र खरीदने की इस पूरी व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. गांवों में गोमूत्र इकट्ठा करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये कमीशन दिया जा रहा है. इससे महिलाओं के लिए भी गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है. बताया जा रहा है कि करीब 300 महिलाओं के सहयोग से यह काम शुरू किया गया है और इन सभी महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है.
गोमूत्र का होगा क्या-क्या इस्तेमाल, जानिए
सवाल ये है कि इतने गोमूत्र का इस्तेमाल क्या होगा. सरकार की योजना के मुताबिक इकट्ठा किए गए गोमूत्र का उपयोग खेती के लिए फायदेमंद उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है. गोमूत्र में अलग-अलग जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेतों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं तैयार की जाती हैं. इन्हें बाद में समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है. इस मॉडल का उद्देश्य खेती में रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना भी है. योगी सरकार का मानना है कि अभी तक गांवों में गाय पालने से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और दूध से बने उत्पादों पर निर्भर रहती है.
20 रुपये प्रति लीटर तक में खरीद सकती है योगी सरकार
इस प्रयोग के जरिए गोमूत्र को भी आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है. 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद होने पर पशुपालकों को गोवंश से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है. आगे इसे 20 रुपये प्रति लीटर तक ले जाने की योजना सफल होती है तो पशुपालकों की आय में और वृद्धि हो सकती है. हालांकि इस स्कीम को सपा ने स्कैम बताया है. सपा प्रवक्ता मोहम्मद आज़म ख़ान ने कहा है कि भाजपा चुनाव के लिए पैसे इकट्ठा करने के लिए गोमूत्र के नाम पर स्कैम करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में गोशालाएं और उनमें रहने वाली गाय सुरक्षित नहीं हैं.
बुलंदशहर से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट, फिर पूरे राज्य में लागू होगी स्कीम
आज़म खान ने कहा कि गोमूत्र खरीदने के नाम पर चलने वाली योजना से ना गौशाला का, ना गाय का और ना ही महिलाओं का किसी तरह का कोई विकास होने वाला है. भाजपा के प्रवक्ता हीरो बाजपेयी जी कहा कि सपा को विकास की हर योजना में खोट ही नज़र आता है. सपा जिस वर्ग (यादव) की राजनीति करती है, उस वर्ग को होने वाला फायदा भी उन्हें रास नहीं आ रहा हैं. उन्होंने कहा कि गोमूत्र खरीदने की योजना का पायलट प्रोजेक्ट बुलंदशहर में शुरू हुआ है. इसमें अब तक 300 महिलाएं जुड़ भी चुकी हैं. अब तक जो गोमूत्र बेकार चला जाता था, वो अब किसानों के लिए आय का अतिरिक्त ज़रिया बनने जा रहा है.
भाजपा ने स्कीम को यादवों से जोड़ा, सपा बोली- स्कैम है
फिलहाल गोमूत्र खरीदने की योजना कितनी सफल होगी, ये भविष्य बताएगा. लेकिन सत्ता और विपक्ष में एक बार फिर गाय के नाम पर आरोप प्रत्यारोप शुरू होता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने गाय से जुड़ा मामला होने को सीधा यादवों से जोड़कर समाजवादी पार्टी पर हमला किया है. वहीं समाजवादी पार्टी इसे किसानों को बहकाने की योजना कह रही है. अब देखना होगा कि किसानों को कितना फायदा होता है और क्या यूपी विधानसभा चुनावों में ये भाजपा को किसानों का वोट दिला पाएगा.