लद्दाख में भारत के पहले नाइट स्काई सैंक्चुअरी का काम अगले महीने हो जाएगा पूरा- जितेंद्र सिंह

हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) लेह और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के बीच इस नाइट स्काई सैंक्चुअरी के लिए एक समझौता हुआ है. यही तीनों मिलकर इसका निर्माण और संचालन करेंगे.

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प्रतीकात्मक फोटो.
नई दिल्ली:


केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि लद्दाख में भारत के पहले नाइट स्काई सैंक्चुअरी का काम एक महीने में पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा, "लद्दाख के हानले में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत सीएसआईआर द्वारा स्थापित भारत के पहले नाइट स्काई सैंक्चुअरी पर काम जोरों पर चल रहा है. जल्द ही काम पूरा हो जाएगा." लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर के साथ बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'दुनिया भर के पर्यटक लद्दाख में आते हैं और क्षेत्र में एस्ट्रो-पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं. नाइट स्काई सैंक्चुअरी के बढ़ने से लद्दाख के पर्यटन को फायदा होगा.'

इस नाइट स्काई सैंक्चुअरी को लद्दाख में 3,500 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है. यहां गर्मियों में दिन के दौरान औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में यह रात में -15 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. यहां अधिक ऊंचाई पर काफी ठंडा हो सकता है. यहां गर्मियों में भी रात के समय का तापमान शून्य से नीचे गिर सकता है. 

शुक्रवार की बैठक इस साल सितंबर में दोनों के बीच हुई बैठक की अगली कड़ी थी, जब केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की थी कि लद्दाख में भारत का पहला नाइट स्काई सैंक्चुअरी स्थापित किया जाएगा. बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित डार्क स्काई रिजर्व चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के हिस्से के रूप में लद्दाख के हानले में स्थित होगा.

हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) लेह और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के बीच इस नाइट स्काई सैंक्चुअरी के लिए एक समझौता हुआ है. यही तीनों मिलकर इसका निर्माण और संचालन करेंगे.

जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2018 की लद्दाख यात्रा के दृष्टिकोण के अनुसार, स्थानीय उद्यमियों को जैम, जूस, हर्बल चाय, विटामिन सी पूरक, स्वास्थ्य पेय, क्रीम, तेल, साबुन जैसे पूर्ण रूपेण जैविक तरीके से बनें लगभग 100 से अधिक उत्पादों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से लाभकारी रोजगार प्रदान किया जाएगा. माथुर ने बताया कि 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर तीन औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती इस वसंत ऋतु में शुरू हो जाएगी. इसमें “संजीवनी बूटी” भी शामिल है, जिसे स्थानीय रूप से “सोला” के रूप में जाना जाता है, इस औषधि में बहुत अधिक जीवन रक्षक और चिकित्सीय गुण विद्यमान होते हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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