भारत के लिए क्यों जरूरी है रॉकेट-मिसाइल फोर्स, जानिए क्या होता है ये, कैसे करता है काम

भारतीय सेना ने रॉकेट मिसाइल फोर्स की मांग की है. आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने सेना की सलाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका जिक्र किया है. हमारे पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन के पास ये फोर्स पहले से ही है.

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आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने किया है रॉकेट-मिसाइल फोर्स का जिक्र
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  • आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने सलाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रॉकेट-मिसाइल फोर्स की वकालत की
  • पड़ोसी चीन और पाकिस्तान के पास पहले ही रॉकेट-मिसाइल फोर्स है
  • भारत के पूर्व आर्मी चीफ मनोज पांडे ने भी इस फोर्स के लिए वकालत की थी
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नई दिल्ली:

बदलती युद्ध रणनीति एवं देश की सुरक्षा जरूरतों को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय सेना ने रॉकेट और मिसाइल सेना बनाने के लिए कमर कस ली है. खासतौर पर जब हमारे पड़ोसी देश इस मामले में खुद को मजबूत कर रहे हों तब देश के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है. सेना के लिए यह मारक दस्ता कितना अहम है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता कि इसका जिक्र खुद सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने किया है. 

आर्मी चीफ ने कर दिया है जिक्र 

रॉकेट मिसाइल फोर्स बनाने की अहमियत बताते हुए भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि चीन और पाकिस्तान से मिल रही चुनौतियों का जवाब देने के लिए इसका गठन समय की जरूरत है. जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में रॉकेट और मिसाइल अलग-अलग नहीं रहे हैं. दोनों ही बहुत असरदार और निर्णायक हमला करने में सक्षम हैं. साफ है कि भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाने को लिये जोर-शोर से काम कर रही है. मौजूदा आधुनिक युद्ध की जरुरतें काफी बदल रही है ऐसे में सेना प्रमुख ने कहा कि हमें एक मिसाइल फोर्स चाहिए. आज रॉकेट और मिसाइल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि अगर हमें बड़ा असर पैदा करना है तो रॉकेट और मिसाइल दोनों यह काम कर सकते हैं. पाकिस्तान ने पहले ही रॉकेट फोर्स बना ली है और चीन के पास भी ऐसी फोर्स है. इसलिए अब भारत के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वह ऐसी फोर्स बनाए. यह अधिक तेज , सटीक और लंबी दूरी तक मार करने वाली फोर्स होगी.


रॉकेट-मिसाइल फोर्स क्या होती है?

रॉकेट-मिसाइल फोर्स एक विशेष सैन्य इकाई होती है. जिसमें लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइलों को एक ही कमांड के तहत रखा जाएगा. माना जा रहा है कि यह तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) की संयुक्त यानी ट्राई-सर्विस फोर्स होगी. सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक जंग में अब रॉकेट और मिसाइल को अलग-अलग नहीं देखा जाता. समझा जाता है कि इस फोर्स में पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, प्रलय टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जैसे सिस्टम शामिल हो सकते हैं. प्रलय मिसाइल कम दूरी के मारक क्षमता वाली ऐसी मिसाइल है जो दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकाने को बर्बाद कर सकती है वही ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसके हमले से किसी का बच पाना मुश्किल है.  सेना प्रमुख के मुताबिक भारत अपनी लंबी दूरी की हमले की क्षमता लगातार बढ़ा रहा है. पिनाका सिस्टम का सफल परीक्षण 120 किलोमीटर की रेंज तक किया जा चुका है. पिछले महीने डीआरडीओ ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था. इसकी अधिकतम रेंज 120 किलोमीटर है.

सलाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी

पूर्व सेना प्रमुख ने भी की थी वकालत 

जनरल द्विवेदी ने कहा कि हमने 150 किलोमीटर तक की रेंज के लिए भी कई कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं. आगे चलकर इसकी रेंज 300 से 450 किलोमीटर तक पहुंच सकती है. इससे पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे (सेवानिवृत्त) ने भी 450 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली रॉकेट फोर्स बनाने की वकालत की थी. उनका कहना था कि ये हथियार न सिर्फ ज्यादा दूरी तक मार करते हैं, बल्कि ज्यादा सटीक भी होते हैं. साथ ही, समान असर के लिए ये ज्यादा किफायती भी साबित होते हैं.


चीन और पाकिस्तान के पास रॉकेट फोर्स

आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान ने अपनी आर्मी रॉकेट फोर्स बनाने की योजना का खुलासा किया था. वहीं चीन के पास पहले से ही ऐसी फोर्स है, जो जमीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों को संभालती है. जिनमें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार शामिल हैं. चीन की यह फोर्स उसकी सेना की एक स्वतंत्र शाखा है, जो दुश्मन को डराने, सटीक हमले करने और रणनीतिक समर्थन जैसे मिशनों की जिम्मेदारी निभाती है. ऐसे में भारत के लिए भी जरूरी हो जाता है कि ऐसी रॉकेट और मिसाइल फोर्स हो. हालांकि भारत के पास ऐसे रॉकेट और मिसाइल तो है पर अलग से रॉकेट  मिसाइल फोर्स नही है.

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