बदलाव की चाह या खौफ? बंगाल चुनाव में क्यों हुई रिकॉर्ड वोटिंग, एक्सपर्ट से जानें हर एक वजह

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल के पहले चरण के मतदान ने सभी को चौंका दिया है. पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए 92.66 फीसदी वोटिंग की कल्पना तो शायद ही किसी ने की होगी. आखिर ये हुआ कैसे, इसके पीछे कौन सी वजहें रहीं, जानें सबकुछ.

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बंगाल चुनाव में बंपर तदान के पीछे की वजह जानें.
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  • पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव में 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ जो पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ने वाला आंकड़ा है
  • बीजेपी का कहना है कि बदलाव की लहर और नए चुनावी मुद्दों की वजह से इस बार भारी मतदान हुआ है
  • टीएमसी का तर्क है कि मतदाता संख्या में भारी कमी के कारण वोटिंग प्रतिशत असामान्य रूप से बढ़ गया है
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में पहले चरण में ही बंपर वोटिंग ने सभी को चौंका दिया है. 92.66 फीसदी मतदान ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. हर किसी के जहन में ये सवाल है कि क्या बंगाल में सरकार बदलने वाली है? हालांकि ये तो 4 मई को वोटों की गिनती के बाद ही साफ हो सकेगा. लेकिन सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि ऐतिहासिक मतदान की वजह क्या है. आखिर हर बार की तुलना में इस बार वोटिंग प्रतिशत कैसे बढ़ गया? जानिए क्या कहते हैं कोलकाता के राजनीतिक विश्लेषक जयंता घोषाल.

"मैं पिछले 43 सालों से पश्चिम बंगाल की राजनीति को देखता आ रहा हूं. लेकिन मैंने कभी 92 प्रतिशत मतदान नहीं देखा. अंतिम आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है. ज्यादा वोटिंग प्रतिशत को आमतौर पर सत्ता-विरोधी लहर का संकेत माना जाता है.अब बंगाल बीजेपी खेमा कह रहा है कि इस बार बदलाव के लिए वोटिंग हुई है. लोगों का असंतोष फूट पड़ा है. 

दूसरा मत ये भी है कि ये कहानी दो गुटों की है. टीएमसी खेमा कह रहा है कि एसआईआर की वजह से वोटर्स की संख्या में भारी कमी से बेसलाइन कम हो गई है, जिसकी वजह से वोटर्स का आंकड़ा ज्यादा हो सकता है. बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाता मतदाता घट गए हैं इसलिए, वोटर बेसलाइन कम हो गई और वोटिंग प्रतिशत बढ़ गया है.

बीजेपी की कड़ी टक्कर से टीएमसी के वोटर्स में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है. टीएमसी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है. इसीलिए टीएमसी के मतदाताओं ने भारी संख्या में मतदान किया.

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गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बोगस वोटर्स और घोस्ट वोटर्स अब मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं, इसलिए अब सभी वास्तविक वोटर्स में उतसाह है इसीलिए उन्होंने मतदान किया.

बीजेपी और टीएमसी दोनों का आंतरिक आकलन है कि अगले चरण (29 अप्रैल) में भी मतदान का पहले चरण का यह हाई परसेंटेज ऐसे ही बरकरार रहेगा. 

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ज्यादा वोटिंग से मतदाताओं के व्यवहार की दिशा का स्पष्ट संकेत मिलता है. या तो बीजेपी या टीएमसी को स्पष्ट बहुमत मिलेगा. त्रिशंकु विधानसभा की कोई संभावना नहीं है.

ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं, उनको संघर्ष पसंद है. वह दूसरे चरण के चुनाव में भी पूरी ताकत से उतरेंगी.दूसरा चरण टीएमसी फ्रेंडली दक्षिण बंगाल में ज्यादा प्रभावी है. उत्तर बंगाल बीजेपी का गढ़ है. राजबंगशी,कामतापुरी,गोरखालैंड का मुद्दा भी था, लेकिन दक्षिण बंगाल में दीदी का प्रभाव ज्यादा है. लेकिन बीजेपी का मानना ​​है कि बंगाल का अभिजात वर्ग, भद्रलोक समुदाय, निराश है और वे सत्ताधारी सरकार के खिलाफ वोट देंगे.शिक्षा घोटाला और आरजी कर रेप जैसे मामले टीएमसी के खिलाफ काम करेंगे.

बीजेपी का मानना ​​है कि इस बार उनकी बदली हुई रणनीति की वजह से भी भारी मतदान हुआ है. पहले, यह मुख्य रूप से जय श्री राम-हिंदुत्ता का मुद्दा था, लेकिन इस बार बीजेपी का अभियान "नए बंगाल के लिए वोट" पर आधारित है. "हम परिवर्तन चाहते हैं" कोई गुंडागर्दी नहीं, कोई आतंक का राज नहीं, हम अधिक रोजगार देंगे, उद्योग लाएंगे. 29 तारीख को कोलकाता में होने वाला चुनाव इन्हीं मुद्दों पर आधारित होगा.

मतदान प्रतिशत इतना ज्यादा क्यों? इस पर बीजेपी का मानना ​​है कि इसकी वजह कुछ और है. इस बार चुनाव आयोग ने हिंसा के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, पहले चरण में एक भी बम विस्फोट नहीं हुआ, कोई हत्या नहीं हुई, कोई घायल नहीं हुआ, इसीलिए लोगों ने निडर होकर मतदान किया.

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TMC का मानना ​​है कि मालदा और मुर्शिदाबाद में मुसलमानों ने TMC को भारी संख्या में वोट दिया क्योंकि वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. ज्यादा मतदान की वजह यही है."

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