कौन थे क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह, 100 साल पहले काकोरी कांड में दी गई थी फांसी, CM योगी और अमित शाह ने भी दी श्रद्धांजलि

Roshan Singh Thakur: ठाकुर रोशन सिंह को काकोरी कांड में गलत तरीके से फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था. उन्होंने हंसते हंसते जान दे दी. आज ही के दिन 22 जनवरी को उन्हें फांसी दी गई थी.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Thakur Roshan Singh
लखनऊ:

भारत के महान क्रांतिकारियों में भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल का नाम तो सभी जानते हैं, लेकिन ठाकुर रोशन सिंह को शायद कम ही लोग जानते हैं. काकोरी कांड में ठाकुर रोशन सिंह को जन्म आज ही के दिन 22 जनवरी 1892 को शाहजहांपुर के नवादा गांव में हुआ था. यूपी की राजधानी लखनऊ में काकोरी पुलिस स्टेशन के नजदीक 9 अगस्त 1925 सरकारी खजाने को लूटा गया था. उसमें ठाकुर रोशन सिंह सीधे तौर पर शामिल नहीं थे. रोशन सिंह को भी 19 दिसंबर 1927 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) के नैनी सेंट्रल जेल में फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया था.

कहा जाता है कि ठाकुर रोशन सिंह की शक्ल केशव चक्रवर्ती नाम के एक और क्रांतिकारी से मिलती है. ब्रिटिश सरकार को लगता था कि रोशन सिंह की केशव चक्रवर्ती है. केशव चक्रवर्ती बंगाल ली अनुशीलम समिति से जुड़े थे, लेकिन ब्रिटिश अफसरों के हाथों में रोशन सिंह से चढ़े. रोशन सिंह बमरौली लूट कांड में शामिल थे और पूरे साक्ष्य भी मिले थे. ब्रिटिश हुकूमत ने रोशन सिंह पर काकोरी कांड का दोष मढ़ा और फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया गया. 

कहा जाता है कि राम प्रसाद बिस्मिल पर खूब दबाव डाला गया कि वो ठाकुर रोशन सिंह का नाम ले लें. उन्हें क्रांतिकारियों के समूह से जुड़ा हुआ बताएं. जब अंग्रेज इसमें सफल नहीं हुए तो रोशन सिंह को दूसरे गंभीर आरोपों में सजा ए मौत दे दी गई. इस फैसले के विरोध में हाईकोर्ट और वायसराय से अपील भी की गई, लेकिन अंग्रेजी सरकार नहीं मानी. 

ठाकुर रोशन सिंह ने 6 दिसंबर 1927 को इलाहाबाद नैनी सेंट्रल जेल से अपने दोस्त को पत्र लिखा था. इसमें एक हफ्ते बाद फांसी दिए जाने की जानकारी थी. उन्होंने लिखा था कि भगवान से दुआ करें और कतई शोक न करे. मेरी मौत खुशी की वजह होगी. उन्होंने लिखा था, 2 साल से परिवार, बीवी-बच्चे से दूर रहने और भजन संगीत में रम जाने से मोह-माया भी कम हो गया है. मैं अब आराम की जिंदगी जीने के लिए जा रहा हूं. 

...जिंदगी जिंदादिली को जान ऐ रोशन
वरना कितने ही यहां रोज फना होते हैं...

कहा जाता है कि फांसी वाले दिन उन्होंने काल कोठरी को छुआ और गीता हाथ में लेकर फांसी घर की ओर चल दिए। फांसी के फंदे को चूमने के बाद रोशन सिंह ने वंदेमातरम का नारा लगाया और फिर शहादत दे दी. फांसी के बाहर रोशन सिंह का पार्थिव शरीर बाहर लाया गया तो वहां खड़े हजारों लोगों ने अमर रहे का नारा लगाया. मेडिकल कॉलेज के बाहर उनकी मूर्ति लगाई गई है, जहां आज भी सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने जुटते हैं.  

Advertisement
Featured Video Of The Day
ICC T20 World Cup 2026 | ICC का Bangladesh पर कड़ा रुख,नहीं माना तो स्कॉटलैंड को मिलेगा मौक़ा