- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केरल का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव मंजूर किया
- कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केरलम के निवासियों के लिए नए शब्दों के उपयोग पर मजाकिया टिप्पणी की
- केरल विधानसभा ने जून 2024 में केरल का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव पारित किया था
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मंगलवार को केरल का नाम बदलने पर मजाकिया लहजे में पूछा कि नए "केरलम" के निवासियों के लिए इस्तेमाल होने वाले "केरलाइट" और "केरलन" शब्दों का अब क्या होगा? हल्के-फुल्के अंदाज में थारूर ने कहा कि 'केरलमाइट' किसी सूक्ष्मजीव जैसा लगता है और 'केरलमियन' किसी दुर्लभ खनिज जैसा.
थरूर का ये अंदाज तब दिखा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को केरल का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. कैबिनेट के फैसले की घोषणा से पहले थारूर ने कहा, "नाम बदलना ठीक है, लेकिन अंग्रेजी बोलने वालों के लिए एक छोटा सा भाषाई सवाल है. केरलाइट और केरलन शब्दों का क्या होगा. केरलमाइट किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और 'केरलमियन' किसी खनिज जैसा." उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए सुझाव दिया कि नए शब्द के लिए प्रतियोगिता कराई जा सकती है.
कैसे बदलता है राज्यों का नाम
केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव पारित किया. इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के लिए संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया.
केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के मामले पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय में विचार किया गया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन विधि मामलों और विधान विभाग तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया. इसके बाद विधायी मामलों और विधान विभाग तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की.
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद, भारत की राष्ट्रपति केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 नामक विधेयक को भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत अपने विचार व्यक्त करने के लिए केरल राज्य विधान सभा को भेजेंगी. केरल राज्य विधानसभा के विचार प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी, ताकि केरल का नाम बदलकर केरलम किया जा सके.













