PM मोदी ने की असम में वायुसेना के 'संकटमोचक' विमान की सवारी, जानें क्यों है ये इतना खास

भारतीय वायुसेना के पास दुनिया के सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमान माने जाने वाले 12 C-130 हरक्यूलिस विमान हैं. ये न सिर्फ युद्ध के मैदान में बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और बचाव कार्यों में भी भरोसेमंद साथी साबित हुआ है.

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  • PM मोदी ने वायुसेना के C-130J विमान में सवार होकर असम के डिब्रूगढ़ से मोरान का दौरा किया
  • C-130J हरक्यूलिस विमान 30 मीटर लंबा, 12 मीटर ऊंचा और 19 टन वजन उठाने में सक्षम एक विश्वसनीयविमान है
  • भारतीय वायुसेना के पास 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान हैं, जो 2011 से अलग-अलग चरणों में शामिल किए गए हैं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वायुसेना के C-130 विमान में सवार होकर असम के डिब्रूगढ़ से मोरान पहुंचे, इस पर देशवासियों की ही नहीं, दुनिया की निगाहें रहीं. उनकी मोरान यात्रा क्यों अहम है, इस पर आगे बात करेंगे, लेकिन पीएम मोदी जिस विमान में सवार होकर मोरान पहुंचे, उसे भारतीय वायुसेना का संकटमोचक भी कहा जाता है. ये विमान न सिर्फ युद्ध के मैदान में बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और बचाव कार्यों में भी भरोसेमंद साथी साबित हुआ है.

C-130 विमान क्यों है खास?

  • हरक्युलिस C-130J विमान 30 मीटर लंबा, 12 मीटर ऊंचा है. ये 19 टन वजन उठा सकता है. 
  • यह 643 किमी की रफ्तार से उड़ सकता है और एक बार में 3,334 किमी उड़ान भर सकता है.
  • इस विमान को दुर्गम इलाकों में बेहतर ढंग से काम करने के लिए अपग्रेड किया गया है. 
  • 4 इंजन वाला ये विमान करीब 90 आम यात्रियों या 64 सैनिकों के साथ उड़ान भर सकता है.
  • ये विमान बहुत छोटे रनवे पर उतर सकता है और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी लैंड कर सकता है. 
  • इतना ही नहीं ये विमान खराब से खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है.

दुनिया का सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमान 

अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के C-130J को दुनिया का सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमान माना जाता है. इसके नाम 54 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं. अमेरिका और भारत समेत 23 से ज्यादा देश इस विमान का इस्तेमाल करते हैं. लॉकहीड मार्टिन 560 से ज्यादा C-130J विमान बनाकर डिलीवर कर चुकी है. क्वाड के तीन अन्य देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान इस विमान का इस्तेमाल करते हैं. 

भारत के पास कितने C-130 विमान हैं?

भारतीय वायुसेना के पास इस वक्त 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान हैं, जिन्हें अलग-अलग चरणों में सेना में शामिल किया गया है. 2011 में पहली बार ये वायुसेना में शामिल हुआ था. भारत ने पहली बार 2008 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ 6 हरक्यूलिस विमानों का सौदा किया था. 2011 से पहले इनकी डिलीवरी हो गई थी. इसके बाद 6 और ऐसे विमानों का ऑर्डर दिया गया, जो 2017 और 2019 के बीच वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए. इस विमान के बेड़े गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस और पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात हैं.

स्पेशल ऑपरेशन में बेहद मददगार 

ये विमान स्पेशल ऑपरेशन में भी काम आता है. सर्च और रेस्क्यू में भी इसकी मदद ली जाती रही है. आसमान से सैनिकों को उतारने से लेकर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तक इसके जरिए की जाती है. इस विमान से बड़ी संख्या में सैनिकों को तेजी से कहीं भी पहुंचाया जा सकता है. ये विमान सैनिकों के लिए रसद और अन्य सामान ले जाने के भी बहुत काम आता है. 2020 में चीन के साथ तनाव के दौरान इसी विमान से लद्दाख में दुनिया के सबसे ऊंचे एयरफील्ड पर सैनिकों की तैनाती हुई थी. उत्तरकाशी में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए ड्रिल मशीन भी इसी विमान से भेजी गई थी. 

भारत में प्रोडक्शन का प्लान

भारतीय वायुसेना सोवियत दौर के AN-32 और IL-76 विमानों को बदलने के लिए 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की तैयारी में है. इसके लिए ब्राजील की एम्ब्रेयर का केसी-390 मिलेनियम और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का ए-10एम विमान भी रेस में है. लॉकहीड मार्टिन ने ऑफर दिया है कि अगर उसे ये कॉन्ट्रैक्ट मिलता है तो वह अमेरिका के बाहर C-130J के लिए दुनिया का पहला प्रोडक्शन हब भारत में स्थापित करेगी.

लॉकहीड मार्टिन ने टाटा के साथ हाथ मिलाकर भारत के बेंगलुरू में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर बनाने की घोषणा की है, जिसके 2027 की शुरुआत तक चालू होने की संभावना है. भारत में C-130J के कलपुर्जे बनाने की शुरुआत हो चुकी है. हैदराबाद स्थित टाटा लॉकहीड मार्टिन एरोस्ट्रक्चर लिमिटेड (TLMAL) में C-130J के एम्पिनेज (पिछला हिस्सा) बनाया जाता है. ऐसे 250 से अधिक पुर्जे अब तक भारत से अमेरिका भेजे जा चुके हैं.

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पीएम मोदी की मोरान यात्रा क्यों खास?

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को असम के मोरान हाईवे पर 100 करोड़ की लागत से बनी 4.2 किमी लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन करेंगे. ये न केवल सुरक्षा बल्कि आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाने के भी काम आएगी.

हाइवे पर ये हवाई पट्टी चीन सीमा से महज 300 किमी दूर है. युद्ध की स्थिति में अगर मुख्य रनवे तबाह होते हैं तो ये हाईवे राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों और C-130J जैसे मालवाहक विमानों के लिए रनवे का काम करेगा.

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यह पट्टी 40 टन के लड़ाकू विमानों और 74 टन वजनी ट्रांसपोर्ट विमानों का वजन सहने में सक्षम है. पूर्वोत्तर भारत में पहली बार इस तरह हाईवे को हवाई पट्टी में तब्दील किया गया है. देश में ऐसे 28 इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बनाई जा चुकी हैं. 

ये भी देखें- हाईवे से उड़ान, सुरक्षा का संदेश, असम में पीएम मोदी का अहम कार्यक्रम

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