क्या है अजीब सा नाम वाला 'म्याऊं-म्याऊं' ड्रग? युवाओं में क्यों है इतना पॉपुलर, साइड इफेक्ट भी जान लीजिए

Meow Meow Drug Explained: युवाओं के बीच पॉपुलर म्याऊं-म्याऊं ड्रग क्या है. जिसे बनाने वाले कैमिकल पर सरकार ने बैन लगा दिया है. ये युवाओं को अंदर से खोखला कर रही थी.

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  • मेफेड्रोन या म्याऊं-म्याऊं ड्रग भारत में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय सिंथेटिक स्टिमुलेंट है
  • यह ड्रग शरीर को नुकसान पहुंचाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है
  • म्याऊं-म्याऊं के सेवन से नाक से खून आना, दिल की धड़कन असामान्य होना और डिप्रेशन जैसी समस्याएं होती हैं
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देश के युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने वाली 'मेफेड्रोन' यानी 'म्याऊं-म्याऊं' ड्रग के खिलाफ भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. पार्टियों की शान और युवाओं की पहली पसंद बन चुका यह सफेद पाउडर असल में रगों में दौड़ता 'धीमा जहर' है. लेकिन अब इस मौत के सौदागरों पर सरकार ने सबसे बड़ा प्रहार किया है. गृह मंत्रालय की सख्ती के बाद इस सिंथेटिक ड्रग को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कैमिकल पर बैन लगा दिया गया है. 'गरीबों की कोकीन' कही जाने वाली यह ड्रग न केवल शरीर को खोखला कर रही है, बल्कि युवाओं के मानसिक संतुलन को भी तबाह कर रही है. आखिर क्या है म्याऊं-म्याऊं का वो 'केमिकल लोचा' जिसे सरकार ने अब जड़ से उखाड़ने की ठानी है? आइए जानते हैं.

आखिर क्या है 'म्याऊं म्याऊं' ड्रग?

इसका वैज्ञानिक नाम मेफेड्रोन है. ड्रग तस्करों और युवाओं के बीच कोड नाम 'म्याऊं-म्याऊं' या 'M-Cat' के नाम से मशहूर यह ड्रग एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट यानी कृत्रिम उत्तेजक है. यह कोकीन जैसा ही तगड़ा नशा देती है. ये ड्रग कीमत में काफी सस्ती होती है, जिससे कॉलेज जाने वाले छात्र आसानी से इसके चंगुल में फंस जाते हैं. इसे लेने के बाद लोग खुद को इंस्टेंट एनर्जी महसूस करते है, जो रेव पार्टियों के कल्चर में फिट बैठता है. इसे पहले इंटरनेट पर पौधों की खाद या बाथ साल्ट के नाम से बेचा जाता था, ताकि पुलिस और प्रशासन की नजर से बच सकें.

युवाओं को 'जॉम्बी' बना रहा है ये नशा

डॉक्टरों के मुताबिक, 'म्याऊं-म्याऊं' का सेवन शरीर के लिए तबाही जैसा है. इसके साइड इफेक्ट्स रूह कंपा देने वाले हैं. ड्रग की वजह से नाक से खून आना, दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना, दांतों का घिसना और अचानक वजन गिरने जैसे खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. इसके सेवन से मतिभ्रम होता है. इंसान को लगता है कि उसके शरीर पर कीड़े रेंग रहे हैं. ज्यादा ड्रग लेने से गहरे डिप्रेशन की समस्या हो सकती है. इसके अलावा ओवरडोज होने पर दिल का दौरा या ब्रेन हेमरेज का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है.

ड्रग को पहले ही किया जा चुका है बैन

मेफेड्रोन को 2015 में ही NDPS एक्ट के तहत बैन किया गया था, लेकिन अब इसके कच्चे माल पर रोक लगाकर सरकार ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग की कमर तोड़ दी है. हाल ही में केंद्र सरकार ने इस ड्रग को बनाने वाले कैमिकल 2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन पर रोक लगाई है. इसके उत्पादन, स्टॉक और बिक्री पर NCB की सीधी नजर होगी. कोई भी इस कैमिकल को बिना परमिट के नहीं रख सकता.

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