- पश्चिम बंगाल के पहले चरण में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर मतदान प्रतिशत में दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है
- ममता बनर्जी की महिला कल्याण योजनाओं जैसे लक्ष्मी भंडार से करीब ढाई करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता मिल रही है
- 2024 के चुनाव आंकड़ों के अनुसार महिलाएं तृणमूल कांग्रेस को भाजपा की तुलना में दस प्रतिशत अधिक वोट दे रही हैं
पश्चिम बंगाल में महिला वोटों की बहुत चर्चा है.खासकर पहले फेज में 93.19 फीसदी की बंपर वोटिंग के बाद महिलाओं की खासतौर पर चर्चा हो रही है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बार के वो पहले के मुकाबले और बड़ी संख्या में मतदान के लिए घरों से निकली हैं. यही वजह है कि पहले के मुकाबले महिलाओं के मतदान प्रतिशन में दो फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है. चाय की दुकानों पर इस बात की चर्चा हो रही है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का वोट क्या इशारा करता है. अधिकतर जानकारों का मानना है कि जिन महिलाओं को ममता सरकार में पैसे मिले हैं उनका वोट तृणमूल कांग्रेस को मिला है.मगर यह भी जरूर है कि आरजीकार की घटना के बाद महिलाओं का भरोसा ममता बनर्जी से टूटा है.यहीं पर बीजेपी महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है.यही वजह है कि बीजेपी ने कोलकाता के बगल की सीट पानीहाटी से आरजीकार पीडि़ता की मां को चुनाव मैदान में उतारा है.दूसरा मुद्दा है महिला आरक्षण.लोग मानते हैं कि यह बिल पास होना चाहिए था.
महिला वोर्ट्स की हो रही है चर्चा
कुल मिलाकर बंगाल के चुनाव में महिलाएं अब चर्चा में हैं.हालांकि इस बिल को लेकर राय बंटी हुई है खासकर इसे जिस तरह इसे परिसीमन से जोड़ा गया.वैसे महिलाओं के लिए आरक्षण हो इसके पक्ष नें सभी लोग हैं,इससे कोई इंकार नहीं कर रहा है.अभी तक मोटे तौर पर यह माना जाता रहा है कि महिलाएं बंगाल में ममता बनर्जी को वोट करती आईं हैं. इसके कई कारण हैं जैसे महिला का मुख्यमंत्री होना जिसकी वजह ममता बनर्जी की जुझारू छवि है जो किसी से नहीं डरती हैं.यह एक ऐसी छवि है जिसे महिलाओं में एक हिम्मत भरता है, और उन्हें प्रेरणा भी देता है.दूसरी सबसे बड़ी बात है ममता बनर्जी का महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं चलाना जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है लक्ष्मी भंडार योजना जिसमें सीधे महिलाओं के खाते में पैसे जमा किए जाते हैं वैसे तो ये योजना 2021 से चल रही है मगर 2026 में इसकी धनराशि बढ़ाई गई है.यह योजना 1000 रूपए से शुरू हुई थी.
योजनाओं का भी होता है असर
अब सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 1500 और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1700 रुपए महीने दिए जाते हैं.इस योजना का लाभ करीब ढाई करोड़ महिलाओं को मिल रहा है.मतलब एक चौथाई से अधिक महिला वोटर इसका लाभ उठा रहीं है.इसके अलावा कन्याश्री प्रकल्प जिसमें लड़कियों को स्कॉलरशिप और 18 साल के होने पर एकमुश्त राशि इसके अलावा रूपश्री प्रकल्प जिसमें शादी के समय 25 हजार की मदद,लड़कियों को साइकिल,जय बांग्ला पेंशन जिसमें वृद्ध और निराश्रित महिलाओं को पेंशन जैसी योजनाओं के जरिए ममता बनर्जी ने एक पुख्ता वोट बैंक तैयार किया है.
SIR से पहले क्या था हालात
एसआईआर से ठीक पहले, बंगाल की मतदाता सूची में प्रति 1,000 पुरुषों पर 969 महिलाएं थीं जो राज्य के लिए एक रिकॉर्ड था.28 फरवरी को प्रकाशित एसआईआर-बाद की सूची में, यह अनुपात घटकर 964 हो गया.वैसे बिहार में भी एसआईआर के बाद महिलाओं की संख्या 907 से घटकर 893 से भी कम हो गई थी मगर इसके बावजूद महिलाओं ने नीतीश कुमार को जम कर वोट दिया.यही नहीं यदि पश्चिम बंगाल में महिला उम्मीदवारों की बात करें तो 2021 में जहां 240 महिलाएं चुनाव लड़ रहीं थी वहीं इस बार 2026 में 385 महिलाएं मैदान में हैं.जिसमें से 55 महिलाएं तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहीं हैं और 44 कांग्रेस के टिकट पर,वाममोर्चा ने 35 और बीजेपी ने 33 महिलाओं को टिकट दिया है.2024 चुनाव के आंकडों को देखें तो माना जाता है कि पुरुषों ने तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले 4 फीसदी ज्यादा वोट किए हैं वहीं महिलाओं ने बीजेपी के मुकाबले तृणमूल कांग्रेस को 10 फीसदी अधिक वोट दिए हैं.कुल मिलाकर यदि बीजेपी को बंगाल जीतना है तो उसे ममता बनर्जी के महिला मतदाताओं में जबरदस्त सेंध लगानी होगी क्योंकि बंगाल में महिलाएं हर बार दीदी की नैया पार लगा देती है.
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