- जुलाई के बाद अल नीनो के उभरने की संभावना बढ़ रही है, जिसका असर भारतीय मानसून के दूसरे हिस्से पर पड़ सकता है
- दिल्ली-एनसीआर में 15 मार्च से मौसम में बदलाव होगा, आसमान घने बादलों से ढके रहेंगे और हल्की बारिश की संभावना है
- एनसीआर क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और अधिकांश इलाके येलो जोन में आ गए हैं
दिल्ली‑एनसीआर से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक जुलाई के बाद मौसम का रुख बदलने के संकेत मिल रहे हैं. मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडलों ने अल नीनो को लेकर चेतावनी जारी की है. आकलन के अनुसार, जुलाई के बाद अल नीनो के उभरने की प्रबल संभावना है, जिसका असर भारतीय मानसून के दूसरे हिस्से पर पड़ सकता है. मौसम विभाग के एक्सपर्टस का मानना है कि इस बदलाव से न सिर्फ बारिश के पैटर्न में उतार‑चढ़ाव देखने को मिल सकता है, बल्कि इसके चलते खरीफ फसलों पर असर, पानी की कमी और गर्मी के स्तर में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.
दिल्ली-एनसीआर के मौसम पर क्या अपडेट
मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार 14 मार्च को एनसीआर में अधिकतम तापमान करीब 33°C और न्यूनतम 19°C रहने का अनुमान जताया गया था और इस दौरान आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढके रहने का भी अनुमान लगाया था. वहीं 15 मार्च को अधिकतम तापमान 31°C और न्यूनतम 18°C रहने का अनुमान है; इस दिन आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहेगा और हल्की बारिश/बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है. 16 मार्च को मौसम आंशिक रूप से साफ रहने की संभावना है, जब अधिकतम 32°C और न्यूनतम 15°C रहने का अनुमान है.
दिल्ली-एनसीआर में 15 मार्च से मौसम का मिजाज बदलने वाला है. पिछले दो दिनों से मौसम में हो रहे बदलाव के संकेत अब साफ दिखाई देने लगे हैं. मौसम विभाग के अनुसार 15 मार्च को पूरे एनसीआर में आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है. इससे बढ़ती गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी और मौसम सुहावना हो जाएगा.
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AQI येलो जोन में: हवा की गुणवत्ता में सुधार
मौसम में बदलाव का असर हवा में भी दिख रहा है. पिछले दो दिनों में एनसीआर के कई इलाकों में AQI में सुधार दर्ज किया गया है और क्षेत्र येलो ज़ोन में पहुंचा है, यानी हवा की गुणवत्ता मध्यम स्तर पर है. दिल्ली के मॉनिटरिंग स्टेशनों पर आनंद विहार 168, बवाना 184, अलीपुर/अशोक विहार 132, आया नगर 122, बुराड़ी क्रॉसिंग 126, कैंटोनमेंट 127, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स 128, CRRI मथुरा रोड 126, कर्णी सिंह शूटिंग रेंज 122 दर्ज किया गया. नोएडा में सेक्टर‑125 133, सेक्टर‑62 118, सेक्टर‑1 137, सेक्टर‑116 126; ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क‑3 129, नॉलेज पार्क‑5 189; गाजियाबाद में इंदिरापुरम 129, लोनी 173, संजय नगर 122, वसुंधरा 149 दर्ज किया गया. विशेषज्ञों के अनुसार 15 मार्च की संभावित बारिश और तेज हवाओं से धूल‑कण घट सकते हैं और AQI में और सुधार हो सकता है.
जुलाई के बाद अल नीनो के उभरने की संभावना
अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडलों के मुताबिक 2026 के दूसरे हिस्से में अल नीनो के विकसित होने की संभावना बढ़ रही है. अमेरिकी एजेंसी NOAA के Climate Prediction Center ने अपने लेटेस्ट ENSO Diagnostic Discussion में कहा है कि जून से अगस्त के दौरान अल नीनो उभरने की संभावना 62% है और इसके कम से कम 2026 के अंत तक बने रहने की संभावना है. इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले महीने में La Niña से ENSO‑neutral की ओर बढ़ने की उम्मीद है और मई से जुलाई 2026 तक ENSO‑neutral के अनुकूल रहने की संभावना 55% बताई गई है.
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मानसून के ‘दूसरे भाग' पर असर की आशंका
अल नीनो अगर जुलाई के बाद विकसित होता है, तो वह भारत के दक्षिण‑पश्चिम मानसून जून से सितंबर के पीक सीज़न के साथ मेल खा सकता है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मानसून के दूसरे भाग (यानी जुलाई‑अगस्त के बाद वाले चरण) में बारिश का मौसम प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि दिल्ली‑एनसीआर के साथ‑साथ उत्तर प्रदेश‑बिहार जैसे इलाकों में भी “जुलाई के बाद हवा बदलने” वाले संकेतों पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मानसूनी बारिश का पैटर्न खेती और जल‑उपलब्धता के लिहाज से अहम माना जाता है.
उत्तर प्रदेश और बिहार में, मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय संकेतों को देखते हुए जुलाई के बाद मौसम की अनिश्चितता बढ़ सकती है. इन राज्यों में मानसून के दूसरे चरण की बारिश खेती और जलस्तर के लिए बेहद अहम मानी जाती है. यदि अल नीनो सक्रिय होता है, तो बारिश के पैटर्न में उतार‑चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इससे कुछ इलाकों में अपेक्षित बारिश नहीं होने, लंबे समय तक गर्मी बने रहने और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर कृषि और आम जनजीवन पर पड़ सकता है.
कम बारिश होने पर बढ़ सकती हैं चुनौतियां
अल नीनो की यह स्थिति खरीफ फसलों के लिए खतरा पैदा कर सकती है. मानसून के दूसरे हिस्से में बारिश प्रभावित होने पर खेती पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. खासकर उन इलाकों में जहां बुवाई‑सिंचाई का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर होता है. NOAA और अंतरराष्ट्रीय आकलनों में भी यह बात सामने आती है कि अल नीनो वर्षों में कई क्षेत्रों में कम बारिश और असामान्य गर्मी/लंबे हीटवेव देखे गए हैं, जिसमें भारत भी शामिल है.
पानी की कमी और रिकॉर्ड गर्मी का जोखिम
अल नीनो की संभावना देश में पानी की कमी और गर्मी के रिकॉर्ड स्तर बढ़ाने वाली स्थिति भी बना सकती है. NOAA के आकलन में भी अल नीनो वर्षों में असामान्य रूप से उच्च तापमान, लंबी गर्मी की लहरें और कई हिस्सों में औसत से कम बारिश की बात कही गई है. यानी एक तरफ मार्च में बादल‑बारिश से तात्कालिक राहत मिल सकती है, लेकिन दूसरी तरफ जुलाई के बाद के संकेत बताते हैं कि मौसम का बड़ा “टर्न” मानसून सीज़न के बीच में भी आ सकता है.
दक्षिण में अगले हफ्ते बारिश का पूर्वानुमान
उधर दक्षिण भारत में, आपके दिए कंटेंट के मुताबिक IMD ने दक्षिणी क्षेत्र में मौजूद निम्न दबाव प्रणाली के असर से अगले सात दिनों में तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मध्यम वर्षा की संभावना जताई है. बयान के अनुसार दक्षिणी तटीय जिलों में एक‑दो जगह हल्की बारिश और 17 मार्च को दक्षिणी तटीय/उत्तरी आंतरिक/डेल्टा जिलों व कराईकल में गरज के साथ हल्की‑मध्यम बारिश की संभावना बताई गई है.














