संसद के दोनों सदनों से वक्फ बिल (Waqf Bill) आसानी से पास हो गया. लेकिन 'पासिंग मार्क' बहुत कुछ बता रहे हैं. वक्फ बिल राज्यसभा (Voting in Rajya Sabha) में शुक्रवार तड़के दो बजकर 36 मिनट पर पारित हुआ. बिल के पक्ष में वोट पड़े 128 और विरोध में वोट पड़े 95. दोनों खेमे इसको लेकर कितने अलर्ट थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोनिया गांधी खुद सदन में मौजूद थीं. पूरे समय वह अपनी सीट पर बैठी रहीं.
NDA का संख्याबल- 121, वक्फ बिल के समर्थन में वोट मिले 128
अब बात करते हैं पासिंग मार्क्स की. दरअसल NDA को बिल के समर्थन में 128 वोट मिले. यह उसके संख्या बल 121 (115 निर्वाचित + 5 मनोनीत) से 7 ज्यादा है. यानी सरकार को उम्मीद से 7 वोट ज्यादा मिले. अब जरा विपक्ष का नंबर देखिए. बिल के विरोध में 95 वोट पड़े. यह ऊपरी सदन में इंडिया गठबंधन की ताकत 85 की है. आखिर यह चमत्कार हुआ कैसे? जरा समझिए
अंतरआत्मा की आवाज पर वोट देने की छूट से बदला गेम
बीजू जनता दल (BJD) और YSR कांग्रेस वे पार्टियां थीं, जिन्होंने अपने सांसदों को अंतरआत्मा की आवाज पर वोट करने की छूट दी थी. अब जरा समझिए 'अंतरआत्मा' की आवाज पर कौन से सांसद पक्ष और विपक्ष के बीच कैसे बंटे. सबसे चौंकाऊ स्टैंड रहा AIADMK का. तमिलनाडु में बीजेपी के साथ नई पार्टरनशिप की तैयारी की बीच AIADMK ने बीजेपी को सरप्राइज दिया.
बीजू जनता दल के सांसदों ने बिल के समर्थन में किया वोट
उसके एक सांसद ने बिल के खिलाफ वोट किया. ओडिशा में जिस बीजू जनता दल का बीजेपी ने सूपड़ा साफ किया, उसके दो सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट किया. दरअसल इस वोट के जरिए अपने वोट बैंक को भी साधने का खेल चला.
वाईएसआर कांग्रेस ने विपक्षी गठबंधन को चौंकाया
वोटिंग में इंडिया गठबंधन को भी सरप्राइज मिला. वाईएसआर कांग्रेस इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं, लेकिन मुस्लिम भावनाओं के जुड़ा मुद्दा होने के कारण उसके सांसद विपक्ष के साथ लामबंद हो गए. 8 में से 7 सांसदों ने बिल का विरोध किया.
उसके एक सांसद ने बिल के समर्थन में वोट दिया. आपको फिर एक बार याद दिला दें कि वाईएसआर कांग्रेस वह पार्टी थी, जिसने अपने सांसदों को व्हिप के बंधन में नहीं बांधा था. कपिल सिब्बल ने भी बिल के विरोध में वोट दिया.
वोटिंग के दौरान विपक्ष के 4 सांसद रहे गैरहाजिर
वोटिंग के दौरान कुछ सांसद अलग-अलग कारणों से गैरहाजिर भी रहे. इसमें इंडिया गठबंधन के चार सांसद शामिल थे. शरद पवार, शिबू सोरेन, महुआ मांझी और टीएमसी के एक सांसद ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
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