तमिलनाडु में पूर्व उप-मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने टीवीके (TVK) सरकार को 'फासीवादी' बताया. स्टालिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार हमेशा विनाश की तरफ ले जाता है और यही अहंकार इस सरकार के अंत की वजह बनेगा. उन्होंने पूरे राज्य में हिरासत में लिए गए डीएमके कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है.
तंजावुर प्रदर्शन और कावेरी जल विवाद से बढ़ा तनाव
पूरे विवाद की शुरुआत 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर हुए एक बड़े प्रदर्शन से हुई. इसका नेतृत्व खुद उदयनिधि स्टालिन कर रहे थे. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान डीएमके ने टीवीके सरकार के सामने मुद्दे उठाए थे.
कथित विवादित टिप्पणी से सुलगा विवाद
प्रदर्शन के दौरान अपने संबोधन में उदयनिधि स्टालिन मुख्यमंत्री के कावेरी विवाद को संभालने के तरीके की जमकर आलोचना कर रहे थे. इसी दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने अभिनेत्री तृषा के नाम के नारे लगाने शुरू कर दिए.
भाषण के दौरान थोड़ा रुककर उदयनिधि ने एक कथित द्विअर्थी टिप्पणी कर दी. उनके इस बयान के बाद देश भर में उनकी निंदा होने लगी.
आधी रात को पुलिसिया कार्रवाई हुई
एम.के. स्टालिन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेहद अलोकतांत्रिक और 'अहंकारी' तरीके से उदयनिधि को उनके चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में लिया और गैर-जमानती धाराओं के तहत तंजावुर ले गई. स्टालिन के मुताबिक, यह सब इसलिए किया गया ताकि उदयनिधि को आगामी विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने से रोका जा सके.
हालांकि, अदालत में इस मामले को लेकर सरकार को करारा झटका लगा. जन आक्रोश को देखते हुए सरकारी वकीलों को कोर्ट में यह कहना पड़ा कि उनकी उदयनिधि को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने की कोई मंशा नहीं थी.
'रील्स क्रिएटर' बन चुके हैं मुख्यमंत्री: स्टालिन
डीएमके प्रमुख ने मुख्यमंत्री विजय पर निजी हमला करते हुए कहा कि सरकार चलाने के बजाय वे केवल एक 'रील्स क्रिएटर' की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने के बजाय मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान सिर्फ अपने आलोचकों को सलाखों के पीछे भेजने पर है.
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी विधायक अनिता राधाकृष्णन, मारकंडेयन, नीट-विरोधी प्रदर्शनकारियों और किसानों तक को गिरफ्तार किया जा चुका है.
उदयनिधि का बचाव करते हुए स्टालिन ने साफ किया कि तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता ने किसी अश्लील भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था और न ही किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया था. उन्होंने अन्य राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे किसी बयान पर टिप्पणी या निंदा करने से पहले जमीनी तथ्यों की सही जानकारी हासिल कर लें.
अंत में स्टालिन ने दोहराया कि तंजावुर के प्रदर्शन में जुटी भारी भीड़ मौजूदा शासन के खिलाफ जनता के फूटे गुस्से का सबूत है. उन्होंने टीवीके सरकार को चेतावनी देते हुए पूरे राज्य से गिरफ्तार किए गए सभी डीएमके कार्यकर्ताओं को फौरन रिहा करने की मांग की.
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