- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और विपक्ष के नेता उद्धव ठाकरे के बीच विधान भवन में महत्वपूर्ण बैठक हुई.
- इस बैठक का मुख्य विषय विपक्ष के नेता पद के लिए दावेदारी और अन्य राजनीतिक मुद्दे थे.
- उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की यह मुलाकात महाराष्ट्र की सियासी हलचलों को बढ़ावा दे रही है.
Uddhav Thackeray Meet Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कई ऐसी चीजें हो रही हैं, जो हैरान करने वाली है. कुछ दिनों पहले सालों बार ठाकरे ब्रदर्स साथ आए. NCP के दोनों धड़ों के भी साथ आने की चर्चाएं चली. इस बीच बुधवार को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने हंसते-हंसते उद्धव ठाकरे को साथ आने का खुला ऑफर दिया. अब गुरुवार को उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात हुई. दो विरोधी नेताओं की इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की सियासी हलचलें बढ़ा दी है. इस मुलाकात के क्या मायने है? महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों क्या खिचड़ी पक रही है... आइए जानते है इस रिपोर्ट में.
विपक्ष के नेता पद की दावेदारी पर चर्चा
गुरुवार को उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विधान भवन में मुलाकात हुई. इस मुलाकात का मुद्दा विपक्ष के नेता पद के लिए दावेदारी थी. साथ ही अन्य मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा हुई. विधान भवन के स्पीकर हॉल के पूर्व कक्ष में सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे की यह बैठक चली.
शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और युवा सेना प्रमुख विधायक आदित्य ठाकरे ने सभी विधायकों के साथ राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और उन्हें 'हिंदी थोपने की आवश्यकता क्यों है' नामक पुस्तक भेंट की, जो राज्य भर के विभिन्न संपादकों द्वारा लिखे गए लेखों का संकलन है.
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच बीस मिनट की चर्चा
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद और त्रिभाषी फॉर्मूले, हिंदी की अनिवार्यता पर चर्चा की. हिंदी थोपने की आवश्यकता क्या है? उद्धव ठाकरे ने देवेंद्र फडणवीस को यह किताब दी. देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे से कहा कि यही किताब समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जाधव को भी दी जानी चाहिए.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद विधानसभा अध्यक्ष का अधिकार है, लेकिन विपक्ष के नेता का यह पद अभी तक नहीं दिया जा रहा है, इस संबंध में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की.
इस दौरान ठाकरे की शिवसेना के कुछ विधायक भी मौजूद थे. शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और युवा सेना प्रमुख विधायक आदित्य ठाकरे ने सभी विधायकों के साथ राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और उन्हें 'हिंदी थोपने की आवश्यकता क्यों है' नामक पुस्तक भेंट की, जो राज्य भर के विभिन्न संपादकों द्वारा लिखे गए लेखों का संकलन है.
सीएम फडणवीस ने दिया था साथ आने का ऑफर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को अपने पूर्व सहयोगी उद्धव ठाकरे से कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)उनके साथ विपक्ष में शामिल होने की संभावना नहीं रखती, लेकिन वह सत्ता पक्ष में आ सकते हैं. फडणवीस विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे के विदाई समारोह को संबोधित कर रहे थे. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उनके बगल में बैठे थे.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उद्धव जी, 2029 तक (सरकार में बदलाव की) कोई गुंजाइश नहीं है. हमारे पास दूसरे (विपक्ष) पक्ष में आने की गुंजाइश नहीं है. आपके पास यहां आने की गुंजाइश है, और इस बारे में सोचा जा सकता है. हम इसके बारे में अलग तरीके से सोच सकते हैं.''
2019 में ठाकरे ने लंबे समय के सहयोगी भाजपा से तोड़ा था नाता
ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना ने 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद अपने लंबे समय के सहयोगी भाजपा से नाता तोड़ लिया था. फडणवीस की यह टिप्पणी उनके और शिंदे के बीच जारी अनबन की खबरों के बीच आई है, जिन्होंने 2022 में शिवसेना को तोड़कर भाजपा से हाथ मिला लिया था.
कहा जाता है कि शिंदे उस समय नाखुश थे जब उन्हें 2024 के चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले ‘महायुति' गठबंधन द्वारा भारी जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री पद फडणवीस को सौंपना पड़ा.
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