- जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने दो मजदूरों को गोली मार दी, जिनमें से एक की मौत हो गई।
- घटना स्थल पर सुरक्षा बलों ने त्वरित जांच कर आतंकियों की तलाश शुरू कर दी है और इलाके की घेराबंदी की गई है।
- मृतक मजदूर की पहचान स्थानीय निवासी के रूप में की गई है, जबकि दूसरा घायल मजदूर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जम्मू-कश्मीर में फिर से टारगेट किलिंग की घटना हुई है. आतंकवादियों ने दो मजदूरों पर फायरिंग की है, जिनमें से एक की मौत हो गई है. एक गंभीर रूप से घायल है. आतंकवादियों ने इस घटना को कुलगाम जिले में अंजाम दिया है. इन मजदूरों पर कुलगाम जिले के केल्लम में फायरिंग की गई, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. वहां एक को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दूसरे का इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर है. घायल मजदूर को फिलहाल अनंतनाग मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है. दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के थे. मृतक दीपक छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं, जबकि भूपेंद्र भी वहीं से आकर जम्मू-कश्मीर में मजदूरी कर रहे थे.
घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाके को घेर लिया है और आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि बीते 10 दिनों में यह टारगेट अटैक की दूसरी घटना है. बीते सप्ताह ही अनंतनाग में भी एक पुलिसकर्मी की आतंकियों ने टारगेट अटैक में हत्या कर दी थी. उस घटना के बाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया था और 300 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया था. इस पर सीएम उमर अब्दुल्ला का कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने से हालात और बिगड़ सकते हैं. यह हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब अमरनाथ जी की यात्रा भी चल रही है.
कश्मीर में बड़े पैमाने पर फिलहाल सुरक्षा बलों की तैनाती भी है. इस बीच भी हमला होने से सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं. बता दें कि अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों की 670 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है. इस हमले की भाजपा नेता रविंद्र रैना ने निंदा की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी आतंकियों ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में खून बहाया है. उन्होंने कहा कि यह मासूम लोगों पर हमला है और मानवता को निशाने पर लिया गया है. ऐसे कायराना हमला करने वाले आतंकियों और उनके आकाओं को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद कुछ कम हुए थे हमले, फिर बढ़ी टेंशन
बीते साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें आतंकियों ने लोगों को उनका धर्म पूछकर मार डाला था. इस घटना के बाद सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई थी और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर भी लॉन्च हुआ था. उस घटना के बाद कुछ महीनों तक पहले के मुकाबले शांति रही थी, लेकिन बीते 10 दिनों के अंदर ही इन दो घटनाओं ने फिर सुरक्षा बलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. आमतौर पर आतंकी ऐसी घटनाओं को तभी अंजाम देते हैं, जब यह संदेश जाने लगता है कि अब जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं. माना जा रहा है कि विश्वास की उस खाई को बढ़ाने के लिए ही आतंकियों ने फिर से ऐसी घटना को अंजाम दिया है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों के सामान्य होने पर भी अकसर आतंकवादी ऐसी हरकतें करते हैं.