जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से संबंधों के आरोप में दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकवादी संबंधों के कारण 70 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है.

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प्रतीकात्मक फोटो

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. आरोप है कि दोनों का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से था. बर्खास्त कर्मचारियों में कुपवाड़ा जिले के करनाह निवासी शिक्षक खुर्शीद अहमद राथर और केरन निवासी सहायक पशुपालक सियाद अहमद खान शामिल हैं. शिक्षा विभाग में कार्यरत खुर्शीद अहमद को वर्ष 2003 में रहबर-ए-तालीम के पद पर नियुक्त किया गया था और 2008 में उसे स्थायी शिक्षक बनाया गया. वह प्राथमिक विद्यालय मैन्डपोरा नवा गबरा, कुपवाड़ा में तैनात था. जनवरी 2024 में आतंकवाद से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद से वह जेल में बंद है. पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम लश्कर-ए-तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में दर्ज है.

वहीं सियाद अहमद खान भेड़ प्रजनन एवं पशुपालन विभाग में सहायक स्टॉकमैन के पद पर कार्यरत था. खुफिया एजेंसियों की जांच में उसके भी आतंकवादियों से संबंधों की पुष्टि हुई है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह कदम स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद से जुड़े किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

राथर को जांच से पता चला है कि वह पाकिस्तान स्थित आकाओं के लिए कथित तौर पर हथियार और नशीले पदार्थ खरीदता और वितरित करता था. कुपवाड़ा में हथियार ज़ब्त होने के बाद उसे इस साल की शुरुआत में गिरफ़्तार किया गया था. वहीं खान को एके-47 राइफल के साथ पकड़ा गया था और उस पर आतंकवादियों को पनाह देने, घुसपैठ कराने तथा हथियारों की तस्करी करने का आरोप है. जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि वह पाकिस्तान स्थित एक ‘हैंडलर' के संपर्क में था, जो उससे हथियारों और नशीले पदार्थों की सीमा पार तस्करी कराता था.

अधिकारियों ने उनके कार्यों को ‘‘राष्ट्र के साथ विश्वासघात' बताया, तथा सरकारी स्तर पर आतंकवादी समर्थक नेटवर्क के प्रति प्रशासन की कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद पाया कि उपलब्ध सूचना के आधार पर दोनों की गतिविधियां ऐसी हैं कि उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए. हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकवादी संबंधों के कारण 70 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है.
 

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