केरलम के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर एक सदियों पुरानी परंपरा के लिए विमानों के पहिए थम गए. अवसर था श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के वार्षिक पैनकुनी आराट्टू उत्सव का. ये अनुष्ठान केरलम की राजसी एवं आध्यात्मिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है. जिसका ऐतिहासिक रूप से त्रावणकोर रियासत की मंदिर परंपराओं से संबद्ध माना जाता है. मलयालम पंचांग के माह ‘पैनकुनी' के नाम पर आधारित यह अनुष्ठान ‘आराट्टू' अर्थात समुद्र में पवित्र स्नान का प्रतीक है, जिसके माध्यम से देव विग्रहों का सांकेतिक शुद्धिकरण किया जाता है.
दस दिवसीय इस उत्सव के अंतिम दिन भगवान पद्मनाभस्वामी, नरसिंह मूर्ति और कृष्णस्वामी के विग्रहों को एक भव्य एवं विधिवत जुलूस के साथ मंदिर से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित शांगुमुगम समुद्र तट तक ले जाया गया. इस जुलूस का मार्ग सीधे हवाई अड्डे के रनवे से होकर गुजरा. एयरपोर्ट के ऐतिहासिक निर्माण और त्रावणकोर राजवंश की विरासत से जुड़ा हुआ है. उल्लेखनीय है कि यह हवाईअड्डा वर्ष 1932 में त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार द्वारा निर्मित कराया गया था.
कुछ समय के लिए तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही थम गईं और रनवे शांत हो गया. हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुए इस अनुष्ठान ने एक दुर्लभ दृश्य के दर्शन कराए. विमानों की उड़ान को थाम दिया गया और श्रद्धा और परंपरा को प्राथमिकता देते हुए मार्ग प्रशस्त किया गया.
परंपरा खत्म होने के बाद रनवे का समुचित निरीक्षण, सफाई और सुरक्षित उपयोग की स्वीकृति के पश्चात ही उड़ान संचालन पुनः प्रारंभ किया गया. यह अस्थायी विराम एक दीर्घकालिक स्थानीय परंपरा का प्रतीक है, जिसमें आधुनिक संरचनाएं समय-समय पर अनुष्ठानों के लिए स्थान प्रदान करती आई हैं.
वर्तमान में यह हवाईअड्डा अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसने वर्ष 2021 में इसका परिचालन संभाला था. मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, AAHL ने कड़े विमानन सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इस जुलूस के सुचारू आयोजन को सुनिश्चित किया.
यह परंपरा केरल की सांस्कृतिक विशिष्टता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, जहां आधुनिक प्रणाली और प्राचीन आस्थाएं सह-अस्तित्व में फलती-फूलती हैं. अदाणी समूह के एयरपोर्ट व्यवसाय के माध्यम से इस आयोजन को मिला सहयोग, भारत की जीवंत परंपराओं के सम्मान एवं संरक्षण के व्यापक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है. इसी भावना का प्रतिबिंब आज के ही दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके परिवार द्वारा किए गए दर्शन में भी दिखाई दिया. तिरुवनंतपुरम में प्रस्तुत यह दृश्य एक शांत, किंतु प्रभावशाली संदेश देता है कि प्रगति की राह पर आगे बढ़ते हुए भी, अतीत और परंपरा को संजोकर रखा जा सकता है.
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