ईरान युद्ध की वजह से गहराए पश्चिम एशिया संकट पर नेवी चीफ एडमिरल डीके त्रिपाठी ने गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई में बाधा की वजह से न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ा है. एडमिरल ने कहा कि इसके कारण क्षेत्र में आर्थिक और ऊर्जा अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई है.
नेवी चीफ ने मुंबई में कहा कि समुद्र में होने वाला कंपीटीशन अब केवल ऑयल और एनर्जी तक ही सीमित नहीं रह गया है. अब यह उन संसाधनों की तरफ फैल रहा है, जो भविष्य में विकास और वैश्विक प्रगति की दिशा तय करते हैं. रेयर अर्थ मिनिरल्स, क्रिटिकल मिनरल्स, नए फिशिंग ग्राउंड और डेटा भी इस संकट की चपेट में आ रहे हैं.
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एक दिन पहले नेवी चीफ त्रिपाठी ने कहा था कि जब से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग शुरू हुई है, तब से इस क्षेत्र में 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं. शत्रुतापूर्ण हालात की वजह से लगभग 1,900 जहाज फंसे हुए हैं. होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला रोजाना का ट्रैफिक घटकर 6-7 रह गया है, जबकि संघर्ष से पहले इसका औसत लगभग 130 था.
याद दिला दें कि पश्चिम एशिया में संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला शुरू किया था. ईरान ने जवाबी हमले किए और पलटवार करते हुए खाड़ी में अपने पड़ोसी देशों में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया.
इसी के साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी रोक दी. दुनिया में कच्चे तेल की लगभग 20 फीसदी सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है. इसके ठप होने से तमाम देशों में विकराल संकट खड़ा हो गया है. दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति चरमरा गई है. इसके दुष्प्रभाव अन्य क्षेत्रों तक महसूस किए जा रहे हैं.














