पापा मत जाओ... फिर भी नहीं रुके मोहम्मद शफी.. नौगाम ब्लास्ट में मारे गए टेलर की कहानी रुला देगी

Naugam Blast: शफी की मौत की खबर फैलते ही परिवार और मोहल्ले में मातम छा गया. रिश्तेदार और स्थानीय लोगों का उनके घर पर जमा होना शुरू हो गया. दूर-दूर तक रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं. पीड़ित परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

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नौगाम ब्लास्ट में दर्जी की मौत.
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  • जम्मू-कश्मीर के नौगाम में हुए धमाके में 57 साल के मोहम्मद शफी की मौत हो गई, जो पेशे से टेलर थे.
  • शफी अपने पीछे तीन बच्चे और पत्नी छोड़ गए हैं. वह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे.
  • पीड़ित परिवार ने पुलिस विभाग में दर्जी न होने पर सवाल उठाए और सरकार से मदद की मांग की
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नौगाम:

जम्मू-कश्मीर के नौगाम में शुक्रवार रात हुए धमाके में मारे गए 9 लोगों में 57 साल के मोहम्मद शफी भी शामिल थे. पेशे से टेलर शमी अपने पीछे तीन बच्चे छोड़ गए हैं. परिवार में कमाने वाले वह इकलौते थे. नौगाम पुलिस थाने में नमूने एकत्र करने के दौरान हुए विस्फोट में शमी की मौत हो गई. उनके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. बड़ा सवाल ये भी है कि उनके परिनार का क्या होगा. उनके बच्चों को अब कौन पालेगा.

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शफी की मौत से सदमे में परिवार

घर से निकलते समय शफी कहां जानते थे कि वह वापस नहीं लौटेंगे. हादसे में शमी की मौत के बाद उनका परिवार सदमे में है. पीड़ित परिवार ने बताया कि जब वह घर से बाहर जा रहे थे तो उनकी बेटी ने रो-रोकर कहा था कि पापा मत जाओ. लेकिन वह नहीं रुके और हादसे का शिकार हो गए.बता दें कि मोहम्मद शफी पर्रे शुक्रवार सुबह अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने की उम्मीद में घर से निकले थे. वह हाल ही में पकड़े गए एक ‘‘सफेदपोश'' आतंकी मॉड्यूल से जब्त विस्फोटकों के नमूने इकट्ठा करने में पुलिस की मदद कर रहे थे. वह विस्फोटक के अलग अलग पैकेट बनाकर उनकी सिलाई कर रहे थे.

परिवार ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही पुलिसवाले उनको अपने साथ ले गए थे. बीच में एक बार नमाज पढ़ने वह घर आए थे. फिर शाम को एक बार 9 बजे फिर आए. तभी उनकी बेटी ने रोका भी था. शमी ने कहा कि जाना होगा. फिर रात में उन्होंने ब्लास्ट की आवाज सुनी. परिवार भागकर तुरंत थाने पहुंचा. पूरा थाना तहस नहस था, शवों के चीथड़े उड़ गए गए थे. फिर भी शमी के शव को अस्पताल ले जाकर उसकी पहचान की.

परिवार ने पूछा- पुलिस विभाग में दर्जी क्यों हीं?

पीड़ित परिवार का कहना है कि जब पुलिस विभाग में प्लंबर से लेकर बाकी सारा स्टाफ होता है तो फिर दर्जी क्यों नहीं होते. शफी तो सिर्फ पुलिस की मदद करने गए थे. अब वह सरकार से क्या मांग करें. सिर्फ परिवार ही नहीं शमी की मौत से पूरा मोहल्ला सदमे में है.

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शफी शुक्रवार सुबह जांचकर्ताओं के साथ शामिल हुए और दिन के अधिकतर समय नौगाम पुलिस स्टेशन में ही रहे. वह जुमे की नमाज और रात के खाने के लिए घर लौटे और फिर चले गए और लौटकर नहीं आए. जब वह घर से निकले, तो उनकी पत्नी, बेटी और दो बेटों ने कभी नहीं सोचा था कि उनको वे लोग आखिरी बार देख रहे हैं.

इकलौते कमाने वाले थे शफी, परिवार का क्या होगा?

पड़ोसियों ने बताया कि जब परिवार ने विस्फोट के तुरंत बाद उनके बारे में पूछताछ की, तो पुलिस ने उन्हें बताया कि दर्जी को विस्फोट में चोटें आई हैं. हालांकि, शनिवार तड़के, पुलिस ने परिवार को बताया कि पर्रे की चोटों की वजह से मौत हो गई है और परिवार से उनके शव की पहचान करने को कहा.

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शफी की मौत की खबर फैलते ही परिवार और मोहल्ले में मातम छा गया. रिश्तेदार और स्थानीय लोगों का उनके घर पर जमा होना शुरू हो गया. दूर-दूर तक रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं. पीड़ित परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बड़ा सवाल यह है कि सफी तो चले गए लेकिन अब उनके परिवार को कौन पालेगा. वह नजदीकी वानाबल चौक स्थित अपनी दुकान से जो भी कमाते थे, उसी से परिवार गुजारा करता था.

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