तेलंगाना: नक्‍सल‍ियों के 47 अंडरग्राउंड कैडरों का सामूहिक सरेंडर, 32 हथियार-515 राउंड कारतूस भी सौंपे

तेलंगाना पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है, जहाँ दक्षिण बस्तर के 47 सक्रिय माओवादियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया है. इसमें PLGA बटालियन और DKSZC के खूंखार कमांडरों समेत हेमला आयतू और पोडियम लच्छू जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं. कैडरों ने 32 हथियार भी पुलिस को सौंपे हैं.

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तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP), बी. शिवधर
ANI
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  • भारत सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा था
  • तेलंगाना में माओवादी आंदोलन के 47 अंडरग्राउंड कैडर ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण क‍िया
  • आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के विभिन्न स्तरों के सदस्य और कई प्रमुख कमांडर शामिल हैं
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भारत सरकार ने 31 मार्च 2026 की समय-सीमा के साथ देश को 'नक्सल मुक्त' घोषित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी कई खूंखार नक्सली सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर घने जंगलों में छिपे हुए हैं. 'नक्सलवाद के अंतिम अवशेषों' की एक बड़ी बानगी आज तेलंगाना में देखने को मिली, जहां सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते माओवादियों के एक बड़े किले में सेंध लग गई. दक्षिण बस्तर में सक्रिय भाकपा (माओवादी) के 47 अंडरग्राउंड कैडरों ने एक साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर यह साफ कर दिया है कि अब संगठन के पास न तो विचारधारा बची है और न ही ठिकाने. 

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) बी. शिवधर रेड्डी ने इस बड़ी कामयाबी की पुष्टि करते हुए कहा कि आज, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC), पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) और दक्षिण बस्तर रीजनल कमेटी की 9वीं और 30वीं प्लाटून से जुड़े 47 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें एक राज्य समिति का सदस्य (SCM), तीन डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 24 एरिया कमेटी सदस्य (ACM) और 19 पार्टी सदस्य शामिल हैं.

डीजीपी ने आगे कहा क‍ि ये कैडर अपने साथ 32 हथियार लेकर आए हैं, जिनमें एक एलएमजी (LMG), चार एके-47 (AK-47), तीन एसएलआर (SLR), दो इंसास (INSAS) राइफलें, दो 410 मस्कट, एक 9mm पिस्टल और एक .35mm का हथियार शामिल है. कुल 32 हथियारों के अलावा 26 मैगजीन, 515 राउंड कारतूस और कॉर्डेक्स वायर के 10 बंडल भी बरामद किए गए हैं. अब तेलंगाना में माओवादी आंदोलन का अस्तित्व समाप्त हो चुका है.

संगठन के हर स्तर पर बिखराव

यह आत्मसमर्पण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें माओवादी संरचना के लगभग हर विभाग से जुड़े लोग शामिल हैं. सरेंडर करने वालों में PLGA बटालियन के 4 सदस्य, DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के 27 सदस्य, दक्षिण बस्तर DVC (प्लाटून 9 और 30) के 16 सदस्य हैं. 

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इन बड़े चेहरों ने छोड़ा संगठन

आत्मसमर्पण करने वालों में कई इनामी और खूंखार कमांडर शामिल हैं, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों की रडार पर थे. इनमें DKSZC सदस्य और दक्षिण बस्तर DVC का प्रभारी हेमला आयतू उर्फ विज्जा, DVCM और 9वीं प्लाटून का कमांडर पोडियम लच्छू उर्फ विनोद/मनोज, CYPCM, PLGA बटालियन से बदीसे सुंदरी उर्फ विमला) और सवलाम बिचम उर्फ आद‍ि प्रमुख हैं. 

हथियारों का जखीरा बरामद

माओवादियों ने न केवल आत्मसमर्पण किया, बल्कि अपनी सैन्य शक्ति को भी पुलिस के सुपुर्द कर दिया. कुल 32 हथियार और 515 राउंड कारतूस सौंपे गए हैं, जिससे क्षेत्र में उनकी हमला करने की क्षमता अब लगभग खत्म मानी जा रही है. 

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सरकार की पुनर्वास नीति

तेलंगाना मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले इन लोगों के लिए 1.5 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है. इसके तहत उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता और दीर्घकालिक सहयोग दिया जाएगा ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें. अधिकारियों का मानना है कि 2026 के भ्रष्टाचार-रोधी और माओवाद-विरोधी अभियानों के बीच यह आत्मसमर्पण 'निर्णायक मोड़' है. दक्षिण बस्तर में माओवादी नेटवर्क अब ढहने की कगार पर है, क्योंकि नेतृत्व से लेकर लड़ाकू दस्ते तक, हर स्तर पर विद्रोह और मोहभंग की स्थिति साफ दिख रही है. 

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