दिल्ली में लगी प्रदर्शनी में सिंधु घाटी सभ्यता पर केंद्रित मूर्त कला अभिव्यक्ति

दिल्ली की एग्ज़ीबिट 320 गैलरी में जारी है 'द सिंधु प्रोजेक्ट- अनिग्मा ऑफ रूट्स' प्रदर्शनी का आयोजन

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प्रदर्शनी में शामिल एक कलाकृति.
नई दिल्ली:

'द सिंधु प्रोजेक्ट' वर्तमान भारत और पाकिस्तान में फैले विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र सिंधु नदी घाटी सभ्यता में पुरातात्विक स्थलों और कलाकृतियों की खोज के लिए कलाकारों महविश चिश्ती और गुंजन कुमार की प्रतिक्रियाओं को मूर्त रूप देता है. जाने-पहचाने जड़ों और अलग-अलग समय पर बसे हुए स्थानों की पहेली को शामिल करते हुए समानांतर यात्राओं के माध्यम से, चिश्ती और कुमार, अपने विस्तार-उन्मुख दृष्टिकोण के साथ, पाकिस्तान में तक्षशिला घाटी और भारत में संघोल और धोलावीरा में अपने शोध को एक साथ लाते हैं. 

'द सिंधु प्रोजेक्ट' में चिश्ती के एक्रिलिक इंस्टालेशन की लयबद्ध ऊर्जा को कुमार की कोमल कामुकता से भरी कलाकृतियों के साथ रखकर एक अनोखा अहसास जगाने की कोशिश की गई है. 

'द सिंधु प्रोजेक्ट: अनिग्मा ऑफ रूट्स' प्रदर्शनी का आयोजन दुनिया के कई शहरों में किया जा रहा है जिसकी शुरुआत जून 2021 में अमेरिका के शिकागो में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट से हुई और जिसके बाद इसका आयोजन नवंबर 2021 में लाहौर, पाकिस्तान में किया गया. 

अब दिल्ली में इस प्रदर्शनी को शालीन वाधवान ने क्यूरेट किया है और एग्ज़ीबिट 320 गैलरी में ये प्रदर्शनी लगाई गई है. 14 अप्रैल को शुरू हुई इस प्रदर्शनी को 28 मई तक देखा जा सकता है. द सिंधु प्रोजेक्ट इंडिया आर्ट फेयर 2022 के पैरेलल प्रोग्राम का हिस्सा है और प्रोग्राम पार्टनर के तौर पर द अमेरिकन सेंटर नई दिल्ली सहयोग कर रहा है.

द सिंधु प्रोजेक्ट में शैक्षिक, अकादमिक और कला के चाहने वालों के साथ संस्थागत सहयोग से आम लोगों के लिए सार्वजनिक कार्यक्रम हो रहे हैं. कलाकार और क्यूरेटर, दोनों अधिक से अधिक लेक्चर, पैनल डिस्कशन, विशेष प्रस्तुतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं और सिंधु बेसिन में अपने पुरातात्विक साइट के दौरे और अनुसंधान का प्रदर्शन कर रहे हैं.

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