किसी ने लगाया आरोप तो कोई बोला निर्दोष... ये हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के 10 अहम किरदार

Shankaracharya Row: इस विवाद के एक या दो नहीं पूरे 10 किरदार हैं. एक खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो खुद को निर्दोष बता रहे हैं और बाकी वे जो या तो इस मामले में खुद फंसे हैं या फिर आरोप लगा रहे हैं. इनके बारे में डिटेल में जानें.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद के किरदारों के बारे में जानें.
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  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रयागराज में नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज है
  • मुकुंदानंद नाम के शिष्य को भी यौन शोषण के मामले में सह‑आरोपी बनाया गया है और कोर्ट में सुनवाई चल रही है
  • भूमिका द्विवेदी ने मठ में लग्जरी माहौल और बटुकों के शोषण संबंधी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनकी अभी जांच जारी है
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लखनऊ:

बटुकों के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को इलाहाबाद  में सुनवाई होगी. इस बीच, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी-झूंसी) विमल किशोर मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि कथित पीड़ित बटुकों का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफा में जांच अधिकारी को सौंप दी गई है. बता दें कि इस विवाद के एक या दो नहीं पूरे 10 किरदार हैं. एक खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो खुद को निर्दोष बता रहे हैं और बाकी वे जो या तो इस मामले में खुद फंसे हैं या फिर आरोप लगा रहे हैं. इनके बारे में डिटेल में जानें.

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विवाद के 10 'किरदार'

 किरदार नंबर-1: स्वामी अविक्तेश्वरानंद शंकराचार्य इस विवाद के पहले और अहम किरदार हैं, जो इस मामले में फंसे हुए हैं. उनके खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज जिला न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की अर्जी दी थी. उन्होंने दावा किया था कि प्रयागराज में हुए माघ मेले में एक नाबालिग लड़के समते दो लोगों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. यौन उत्पीड़न के आरोप में उनके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. हालांकि शंकराचार्य उन पर लगे सभी आरोपों को “राजनीतिक साज़िश” और “गढ़ा हुआ” बताते हुए खुद को निर्दोष कह रहे हैं.

किरदार नंबर-2: मुकुंदानंद इस विवाद में दूसरे किरदार हैं, जो कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य हैं. उनको इसी केस में सह‑आरोपी बनाया गया है. दोनों के खिलाफ पिछले एक साल में एक नाबालिग समेत दो लोगों के यौन शोषण के आरोप में 21 फरवरी को प्रयागराज में केस दर्ज किया गया था. प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर मामले में दर्ज किया गया है.

किरदार नंबर-3: इस विवाद में तीसरा किरदार पूर्णिमा हैं, जो कि शंकराचार्य की कथित सखी हैं.

किरदार नंबर-4: विवाद की चौथी किरदार हैं भूमिका, जो कि लेखिका हैं. उन्होंने मठ में “लक्ज़री वातावरण”, “गुप्त कमरे”, “दीदी लोगों का क्षेत्र”, “स्विमिंग पूल” और “बटुकों से काम करवाने” जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि मठ में गरीब परिवारों के छोटे बटुकों का शोषणनुमा श्रम कराया जाता है और कुछ क्षेत्रों में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है. भूमिका द्विवेदी ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के वाराणसी मठ में आध्यात्मिक केंद्र जैसी सादगी के बजाय लग्जरी अधिक है. वहां एसी, एलईडी टीवी और महंगे कालीनों से सजा हुआ लग्जरी माहौल है. अंदर के हॉल इतने शानदार हैं कि आंखें चौंधिया जाएं. मठ के भीतर कुछ ऐसे हिस्से और कमरे ऐसे हैं, जहां किसी को जाने की अनुमति नहीं है. इन्हें 'दीदी लोगों का क्षेत्र' कहा जाता है. वहां लिफ्ट से जाने का रास्ता है और आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है. उनका आरोप है कि बेहद गरीब घरों से संबंध रखने वाले छोटे बटुकों से मठ में बहुत काम कराया जाता है. मैनेजर और रसोइया उनके सामान तक चोरी तक कर लेते हैं. उन्होंने दावा किया कि 8 साल के एक सुंदर बटुक ने उनके फोटो खिंचवाने से यह कहकर मना कर दिया था कि 'स्वामी श्री' ने आदेश दिया है कि किसी बाहरी के साथ फोटो मत खिंचवाना.

किरदार नंबर-5: अरविंद इस विवाद में पांचवें किरदार हैं. वह शंकराचार्य के आश्रम के व्यवस्थापक हैं. आश्रम के भीतर पूरी व्यवस्था को लेकर वह भी सवालों के घेरे में हैं. 

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किरदार नंबर-6: मामले में छठवां किरदार हैं आशुतोष महाराज , जो कि शिकायतकर्ता हैं. उन्होंने कोर्ट में आवेदन देकर FIR दर्ज करवाने का आदेश हासिल किया. दरअसल दोनों नाबालिग उनके पास पहुंचे और कथित शोषण की जानकारी दी. वह खुद को पीड़ितों की आवाज बता रहे हैं.

किरदार नंबर-7 : 2 बटुक इस मामले में सातवें किरदार हैं, इन दोनों लड़कों को ही पीड़ित बताया गया है. पहला पीड़ित लड़का 14 साल का है, जबकि दूसरा करीब साढ़े 17 साल का बताया जा रहा है. दोनों कथित रूप से स्वामी के गुरुकुल और शिविरों से जुड़े थे. पॉक्सो कानून के तहत उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है.

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किरदार नंबर-8 : रामभद्राचार्य मामले में आठवें किरदार हैं जो कि आशुतोष महाराज के गुरु हैं. “जगद्गुरु रामभद्राचार्य” के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने यह मामला उठाया है. वहीं स्वामी अविक्तेश्वरानंद ने आशुतोष महाराज के पीछे रामभद्राचार्य के होने का आरोप लगाया है. 

किरदार नंबर-9 : फलाहारी महाराज मामले में अहम किरदार हैं. वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष हैं. वह
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सपोर्ट में हैं और उनको 125 करोड़ हिंदुओं के लिए पूज्यनीय बताया. फलाहारी महाराज ने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी एक अपराधी हैं. फलाहारी महाराज आशुतोष को हिंदू नहीं मानते हैं. उन्होंने 
 शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटने पर 21 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है.

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किरदार नंबर-10 : IPS अजयपाल शर्मा इस मामले में आखिरी और अहम किरदार हैं. आईपीएस अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश पुलिस में एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर जाने जाते हैं. उन्होंने शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर में तैनाती के दौरान कई बदमाशों को मुठभेड़ में ढेर किया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर आईपीएस अजय पाल शर्मा पर केस के शिकायतकर्ता आशुतोष के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया. उन्होंने सबूत के तौर पर एक तस्वीर जारी की, जिसमें आईपीएस शर्मा शिकायतकर्ता के साथ केक काटते नजर आ रहे हैं.

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