55 लाख इनामी माओवादी सुकरू ने AK-47 के साथ किया सरेंडर, चार अन्य साथियों ने भी डाले हथियार 

ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है, जहां 55 लाख रुपये के इनामी वॉन्टेड माओवादी सुकरू उर्फ कोशा सोढ़ी ने अपने चार साथियों और AK‑47 के साथ कंधमाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. सुकरू CPI (माओवादी) की राज्य समिति का वरिष्ठ सदस्य था और लंबे समय से सक्रिय था.

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  • ओडिशा में 55 लाख रुपये के इनामी माओवादी सुकरू ने अपने चार साथियों और एक AK‑47 राइफल के साथ आत्मसमर्पण किया.
  • सुकरू CPI (माओवादी) का वरिष्ठ सदस्य था और कंधमाल के जंगलों में सक्रिय करीब 13 सदस्यों के समूह का नेता था.
  • सुकरू ने जनवरी में जूनियर सदस्य अन्वेश की हत्या की थी जो हथियार डालना चाहता था, जिससे संगठन में तनाव बढ़ा.
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Odisha Sukru Maoist Surrender: ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है. राज्य में वर्षों से सक्रिय और 55 लाख रुपये के इनामी वॉन्टेड माओवादी सुकरू उर्फ कोशा सोढ़ी ने आखिरकार हथियार डाल दिए. सुकरू ने न केवल खुद सरेंडर किया, बल्कि अपने चार साथियों और एक AK‑47 राइफल के साथ कंधमाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.  

ADG (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा ने पुष्टि की कि सभी पांच माओवादी अब पुलिस हिरासत में हैं. अधिकारियों ने बताया कि ये सभी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में औपचारिक तौर पर सरेंडर की घोषणा करेंगे. सुकरू राज्य में CPI (माओवादी) संगठन का वरिष्ठ सदस्य था और लंबे समय से पुलिस की सबसे वांछित सूची में शामिल था.

ओडिशा का सबसे वरिष्ठ सक्रिय माओवादी

49 वर्षीय सुकरू मलकानगिरी ज़िले का रहने वाला था और प्रतिबंधित CPI (माओवादी) की राज्य समिति में महत्वपूर्ण पद पर था. वह करीब 13 सदस्यों के एक छोटे समूह को नेतृत्व देता था, जिनमें से अधिकतर छत्तीसगढ़ के थे. यह समूह मुख्य रूप से कंधमाल के जंगलों में सक्रिय रहता था और सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था.

आंतरिक विवाद और हत्या ने बढ़ाया तनाव

पुलिस के अनुसार, सुकरू खुद अपने संगठन के भीतर सरेंडर करने वालों के लिए बाधा बन गया था. इसी साल जनवरी में उसने अपने ही जूनियर सदस्य अन्वेश की हत्या कर दी थी, जो हथियार डालना चाहता था. अन्वेश को अपने साथियों शीला और जोगेश की मदद से जंगल में दफना दिया गया था. बाद में 22 फरवरी को सुरक्षा बलों ने जोगेश को भी मुठभेड़ में मार गिराया.

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लगातार दबाव के कारण सरेंडर  

DGP YB खुराना ने पहले कहा था कि कंधमाल, रायगढ़ और कालाहांडी के घने जंगलों में चल रहे लगातार पुलिस अभियान, ड्रोन निगरानी और परिवार की अपील से बढ़ते दबाव ने सुकरू को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया. हालांकि उसके कुछ साथी सरेंडर के खिलाफ थे, लेकिन हालात ऐसे बन गए कि सुकरू के पास कोई विकल्प नहीं बचा.

हालिया सरेंडरों से अभियान को मिली गति

हाल के दिनों में कई माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं. 11 मार्च को सानू पोट्टम के नेतृत्व में 10 माओवादी और 15 मार्च को नकुल के नेतृत्व में 11 अन्य नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. इन सरेंडरों के बाद राज्य 31 मार्च तक माओवादी‑मुक्त बनने के अपने लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गया है.

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बाकी कैडर भी मुख्यधारा में लौटेंगे 

अधिकारियों का मानना है कि सुकरू जैसा कुख्यात और वरिष्ठ माओवादी जब हथियार डालता है, तो बाकी बचे कैडरों का मनोबल भी टूटता है. उम्मीद जताई जा रही है कि अब और माओवादी राज्य की सरेंडर और पुनर्वास नीति का लाभ लेकर मुख्यधारा से जुड़ेंगे और हिंसा का रास्ता छोड़ेंगे.  

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