'संविधान को कूडे़दान में नहीं फेंकने देंगे' बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर हमला

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "हाल ही में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे भयावह अध्याय आपातकाल के 50 साल पूरे हुए. लेकिन यह बेहद दुखद है कि कल पटना के उसी गांधी मैदान में, जहां आपातकाल के दौरान लाखों लोग संविधान की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना जुटे थे, एक रैली हुई जिसमें तेजस्वी यादव ने कहा कि हम संसद द्वारा पारित कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे.

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वक्‍फ कानून पर बीजेपी और विपक्ष में आर-पार
नई दिल्‍ली:

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि वक्फ एक्ट को लेकर कहा कि हम संविधान को कूड़ेदान नहीं फेंकने देंगे. विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "हाल ही में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे भयावह अध्याय आपातकाल के 50 साल पूरे हुए. लेकिन यह बेहद दुखद है कि कल पटना के उसी गांधी मैदान में, जहां आपातकाल के दौरान लाखों लोग संविधान की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना जुटे थे, एक रैली हुई जिसमें तेजस्वी यादव ने कहा कि हम संसद द्वारा पारित कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे. उन्होंने वक्फ एक्ट के बारे में कहा कि हम इसे कूड़ेदान में फेंक देंगे, जबकि इसे भारतीय संसद के दोनों सदनों ने पारित किया है. इसका मतलब यह है कि संसद, न्यायपालिका के प्रति कोई सम्मान नहीं है. तेजस्वी यादव और इंडी गठबंधन के अन्य नेताओं ने वोट बैंक के चक्कर में जो कुछ भी कहा है, उससे यह स्पष्ट है कि वे संविधान को कूड़ेदान में फेंकने की 50 साल पुरानी मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं.

क्‍या शरिया कानून लागू करने की सोच रहे हैं?

राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान पर सवाल उठाते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'बीजेपी और एनडीए गठबंधन इस बात के लिए संकल्पित है कि बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को और उसके किसी भी प्रावधान को कोई कूड़े में फेंकना चाहेगा तो हम उसे नहीं होने देंगे. मैं INDI गठबंधन से पूछना चाहता हूं कि क्या आप बिहार में साउदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्की और ISIS से ज्यादा बड़ा शरिया कानून लागू करने की सोच रहे हैं? हमें इस बात का सीधा और स्पष्ट जवाब चाहिए. मैं राजद और सपा जैसे दलों से पूछना चाहता हूं कि समाजवाद तो धन का समान वितरण होना चाहिए यह कहता है लेकिन आप कह रहे हैं कि 49 लाख एकड़ जमीन पर चंद लोगों का कब्जा होना चाहिए... यह एक सोची समझी मानसिकता है जो समाजवाद के विचार से बिल्कुल विपरीत है.'

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