शचि ने शुरू की सुरक्षा और मार्गदर्शन की नई जनरेशन, नौसेना को मिला नया ताकतवर जहाज, जानें इसकी खासियत

शचि दूर तक निगरानी कर सकता है. इसमें हेलीकॉप्टर के लिए डेक और हैंगर है. जरूरत पड़ने पर हवाई मदद मिल सकती है. यह लंबे समय तक समुद्र में रह सकता है. यह तट से लेकर गहरे समुद्र तक काम कर सकता है.

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  • भारतीय नौसेना को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने नया नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल जहाज शचि सौंपा गया है
  • शचि जहाज का नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से लिया गया है, जिसका अर्थ मदद करने वाली होता है
  • यह जहाज समुद्र में निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, और आपदा राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा
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भारतीय नौसेना को एक नया जहाज मिला है. इसका नाम 'शचि' है. यह एक नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल है. गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने इसे नौसेना को सौंपा. यह 11 जहाजों की सीरीज का पहला जहाज है. इसे यार्ड 1280 नाम से बनाया गया था. लॉन्चिंग के समय जहाज को पारंपरिक तरीके से पानी में उतारा गया. जहाज को लॉन्‍च नौसेना के डिप्टी चीफ की पत्नी  शगुन सोबती ने की. नौसेना में इसे एक अहम चरण माना जाता है. इस मौके पर डिप्टी चीफ वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने  कहा कि यह नए युद्धपोतों की शुरुआत है. इससे भारत की समुद्री ताकत बढ़ेगी. उन्होंने यह भी कहा कि यह जहाज कई सालों की मेहनत का नतीजा है.
इससे हिंद महासागर में भारत की पकड़ मजबूत होगी.

पौराणिक कथाओं से लिया गया नाम 

भारतीय नौसेना का शचि जहाज का नाम भारतीय पौराणिक कथाओं से लिया गया हैं. शचि नाम का मतलब है, 'मदद करने वाली'. यह नाम जहाज की भूमिका को दिखाता है. जहाज के चिन्ह में सप्तऋषि तारामंडल और लाल-सफेद लाइटहाउस को दिखाया गया है. यह सुरक्षा और मार्गदर्शन का प्रतीक है. इस प्रोजेक्ट में कुल 11 जहाज बन रहे हैं. इनका निर्माण गोवा और कोलकाता में हो रहा है. गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स मिलकर काम कर रहे हैं. दो जगह निर्माण से काम तेजी से होगा. नौसेना को जहाज समय पर मिलेंगे. इस क्लास के सारे जहाज भारत में ही बनाये जा रहे हैं. इसका डिजाइन और निर्माण भारत में हुआ है. इसमें ज्यादातर स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है. यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा देता हैं. 

समुद्र में फंसे लोगों को बचाएगा

शचि की खासियत की बात करें, तो यह समुद्र में निगरानी करेगा. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेगा. जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी करेगा. यह सर्च एंड रेस्क्यू मिशन में भी काम आएगा. समुद्र में फंसे लोगों को बचाएगा. ऑयल रिग और अहम ठिकानों की सुरक्षा करेगा. आपदा के समय राहत कार्य में भी मदद करेगा. यह जहाज पुराने जहाजों से ज्यादा आधुनिक है. इसमें नए सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें एडवांस रडार और सेंसर हैं.

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भविष्य की चुनौतियों के लिए जरूरी

शचि दूर तक निगरानी कर सकता है. इसमें हेलीकॉप्टर के लिए डेक और हैंगर है. जरूरत पड़ने पर हवाई मदद मिल सकती है. यह लंबे समय तक समुद्र में रह सकता है. यह तट से लेकर गहरे समुद्र तक काम कर सकता है. हालांकि, पहले भी ऐसे जहाज नौसेना के पास थे. लेकिन नए जहाजों से ताकत और बढ़ेगी. हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की गतिविधियां बढ़ रही हैं. इसलिए ऐसे जहाज जरूरी हैं. सच कहें, तो ऐसे जहाज भविष्य की चुनौतियों के लिए जरूरी हैं.

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