- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेंगे
- बैठक का मुख्य विषय क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन का लचीलापन, क्लीन एनर्जी अपनाना और उसमें रणनीतिक सहयोग होगा
- विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिका में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर एक बेहद अहम बैठक के लिए अमेरिका का दौरा करेंगे. विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्रिटिकल मिनरल्स पर मंत्रिस्तरीय बैठक बुलाई है जिसमें शामिल होने के लिए 2 फरवरी से 4 फरवरी तक एस. जयशंकर अमेरिका के दौरे पर होंगे. इस प्रेस रिलीज में लिखा है, "विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री श्री मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए 02-04 फरवरी तक अमेरिका का दौरा करेंगे. यह मंत्रिस्तरीय बैठक सप्लाई चेन के लचीलेपन, क्लीन इनर्जी अपनाने और क्रिटिकल मिनरल्स में रणनीतिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेगी.
साथ ही बताया गया है कि इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ सदस्यों के साथ भी बैठकें करेंगे.
क्या होते हैं क्रिटिकल मिनरल्स?
क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) वे खनिज पदार्थ हैं जो किसी भी देश की आर्थिक उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होते हैं. इनकी कमी से आधुनिक तकनीकों का उत्पादन रुक सकता है, क्योंकि इनके विकल्प खोजना बहुत कठिन या महंगा होता है. जुलाई 2023 में भारत सरकार ने 30 ऐसे क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट जारी की थी. ये खनिज हैं एंटीमनी, बेरिलियम, बिस्मथ, कोबाल्ट, कॉपर, गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट, हेफ़नियम, इंडियम, लिथियम, मोलिब्डेनम, नाइओबियम, निकेल, पीजीई, फॉस्फोरस, पोटाश, आरईई, रेनियम, सिलिकॉन, स्ट्रोंटियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, टिन, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम, ज़िरकोनियम, सेलेनियम और कैडमियम.
यहां ध्यान रहे कि कई लोग क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ में कंफ्यूज करते हैं. रेयर अर्थ 17 विशिष्ट तत्वों का एक समूह है, जबकि क्रिटिकल मिनरल्स एक व्यापक श्रेणी है जिसमें रेयर अर्थ के अलावा लिथियम, कोबाल्ट, और तांबा जैसे आर्थिक/रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य खनिज शामिल हैं.













