- रूस से आने वाला तेल टैंकर एक्वा टाइटन भारत के न्यू मंगलौर बंदरगाह पर 21 मार्च को पहुंचेगा.
- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगभग 700 जहाज युद्ध क्षेत्र बनने के कारण पिछले 20 दिनों से फंसे हुए हैं.
"चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर "एक्वा टाइटन" ("Aqua Titan") भारत की ओर मोड़ दिया गया है. इसमें 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है और यह 21 मार्च को भारत के न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा". पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विदेश सचिव राजेश सिन्हा ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में ये अहम जानकारी दी. इससे पहले, 28 फरवरी को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पिछले 20 दिनों में चार भारतीय-ध्वज वाले ज़हाज़ तेल और गैस का स्टॉक लेकर भारत पहुँच चुके हैं.
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ अब भी फंसे हुए हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पूर्वी इलाके में 2 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज़ जिसमें से एक तेल का टैंकर है.
अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास कितने भारतीय जहाज?
सोमवार को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश सिन्हा ने कहा, "वर्तमान में, फारस की खाड़ी के पश्चिमी भाग में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज और 611 नाविक फंसे हुए हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पूर्वी इलाके में 2 भारतीय ध्वज वाले लोडेड कार्गो जहाज़ खड़े हैं . जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है."
होर्मुज स्ट्रेट के पास कई देशों के करीब 700 जहाज फंसे हैं
राजेश सिन्हा के मुताबिक, इस क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी जहाज संबंधी घटना सामने नहीं आई है. Strait of Hormuz के आसपास दुनियाभर के देशों के करीब 700 जहाज पिछले 20 दिनों से फंसे हुए हैं, क्योंकि Strait of Hormuz मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से war zone बना हुआ है.
तेल टैंकरों के फंसे होने से तेल की कीमत बढ़ी
इसकी वजह से मध्यपूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है. जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को बढ़कर $112 प्रति बैरल के ऊँचे स्तर पर पहुँच गयी है. इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे देश पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का करीब 85 फ़ीसदी कच्चा तेल 40 देश से आयात करता है.
472 से अधिक भारतीय नाविक पहुंचे भारत
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, डीजी शिपिंग ने अब तक 472 से ज़्यादा भारतीय नाविकों की सुरक्षित भारत लौटने में मदद किया है, जिनमें पिछले 24 घंटों में हवाई अड्डों और क्षेत्रीय स्थानों से 25 नाविक शामिल हैं. भारत का समुद्री क्षेत्र सुचारू रूप से चल रहा है और बंदरगाहों पर किसी प्रकार की भीड़भाड़ की सूचना नहीं है. बंदरगाह पोतों की आवाजाही और माल ढुलाई से जुड़े काम पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और उनके पास पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता है, जिसमें अतिरिक्त भंडारण स्थान भी शामिल है.
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