- भैरव बटालियन भारतीय सेना की नई एलीट कमांडो फोर्स है, जिसका गठन पिछले साल अक्टूबर में हुआ था
- यह बटालियन परंपरागत इंफैंट्री और स्पेशल फोर्सेस के बीच एक सेतु का काम करती है
- भैरव बटालियन के जवान अपने चेहरे पर गहरे रंग का कैमोफ्लाज पेंट लगाते हैं ताकि दुश्मन से छिपा जा सके
गणतंत्र दिवस की परेड पर भैरव बटालियन ने भी अपनी ताकत दिखाई. ये पहली बार है जब दुनिया ने भारत की भैरव बटालियन को देखा. भैरव बटालियन का गठन पिछले साल अक्टूबर में ही हुआ था. ये भारतीय सेना की एलीट कमांडो फोर्स है. भैरव बटालियन के कमांडो जैसे ही कर्तव्य पथ पर आए, वैसे ही नजारा देखने वाला था. इसकी अगुवाई मेजर अंजुम गोरका ने की. भैरव बटालियन एक स्पेशल इंफैंट्री यूनिट है, जो परंपरागत इंफैंट्री और स्पेशल फोर्सेस के बीच ब्रिज का काम करती है.
भैरव बटालियन के जवान जब कर्तव्य पथ पर आए तो उनके चेहरे रंगे हुए थे. चेहरे पर लाल और गहरे हरे रंग की लकीरें थीं. मगर ये क्या होती है? दरअसल, ये एक तरह का कैमोफ्लाज पेंट होता है, जो काले या गहरे हरे रंग का होता है. इसे इसलिए लगाया जाता है ताकि रात में या पहाड़ों और जंगलों में दुश्मन को आसानी से न दिख सके.
दुनियाभर में स्पेशल फोर्सेस या कमांडोज अपने चेहरे को इसी तरह रंगते हैं. अपने चेहरे पर इसे इसलिए लगाया जाता है ताकि दुश्मन आसानी से देख न सके और ऑपरेशन के दौरान छिपकर दुश्मन पर अटैक कर सकें.
क्या है ये भैरव बटालियन?
पिछले साल भारतीय सेना ने तीन नई टुकड़ियों का गठन किया था, जिनमें से एक भैरव बटालियन थी. इसकी हर बटालियन में लगभग 250 सैनिक होते हैं. अभी इसकी 15 बटालियन तैयार हो चुकी हैं. ऐसी 25 बटालियन बनाने की योजना है.
सिख लाइट इंफैंट्री की विरासत से बनी ये बटालियन साहस, अनुशासन और उन्नत तकनीकी से संचालित युद्धक उत्कृष्टकता का प्रतीक है. वहीं, 'भैरव' नाम भगवान शिव के शक्तिशाली और रक्षात्मक रूप से प्रेरित है.
भैरव बटालियन के प्रतीक चिह्न में एक कोबरा की तस्वीर बनी है. साथ ही लिखा है- 'भैरव, अदृश्य, अदम्य.' भैरव बटालियन के टीम कमांडर ने बताया था कि इसमें कोबरा इसलिए दिखाया गया है कि अगर वह दुश्मन को काट ले तो उसकी मौत तय है. कुल मिलाकर भैरव बटालियन दुश्मन के लिए काल है.














