राज्यसभा उपसभापति का चुनाव, बिहार के इस नेता पर विपक्ष इस बार लगा सकता है दांव

Rajya Sabha Election: ये लगभग तय है कि एनडीए की तरफ़ से पूर्व उपसभापति हरिवंश को एक बात फिर से मैदान में उतारने की तैयारी हो रही है . हरिवंश का राज्यसभा का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया और उसके साथ ही उपसभापति का पद भी खाली हो गया.

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  • राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव के लिए 17 अप्रैल को मतदान होने की संभावना है
  • विपक्ष की ओर से प्रो मनोज झा को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना है
  • कांग्रेस ने मनोज झा के नाम का प्रस्ताव अपने घटक दलों को भेजा है और विपक्षी दलों की बैठक में इस पर चर्चा होगी
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Rajya Sabha Deputy Chairman election: राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने वाला आगामी चुनाव में इस बार विपक्ष की ओर से उम्मीदवार कौन होगा इसपर सबकी नजरें हैं. संसद के ऊपरी सदन में 17 अप्रैल की तारीख इस अहम पद के चुनाव के लिए तय मानी जा रही है. अगर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती है और दोनों तरफ से उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो राज्यसभा की कार्यवाही में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा. इस बार विपक्षी खेमा हार-जीत के आंकड़ों से परे, एकजुटता दिखाने के लिए अपना साझा उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी में है.

सूत्रों के मुताबिक विपक्ष की ओर से एक बात फिर आरजेडी सांसद प्रो मनोज झा को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. पिछले बार जब उपसभापति पद के लिए चुनाव हुआ था उस वक्त भी विपक्ष की ओर से मनोज झा पर ही दांव लगाया गया था लेकिन आंकड़े पक्ष में नहीं होने के चलते उनकी हार हुई थी . सूत्रों के मुताबिक मनोज झा के नाम का प्रस्ताव कांग्रेस ने अपने घटक दलों को दे दिया है . 

माना जा रहा है कि आज महिला आरक्षण और परिसीमन पर रणनीति बनाने के लिए जो विपक्षी दलों की बैठक बुलाई गई है उसमें इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी. अगर सहमति बनती है तो मनोज झा को उम्मीदवार बनाने का फैसला हो सकता है . 

बिहार के दो दिग्गजों में टक्कर

विपक्ष जहां मनोज झा को आगे कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष यानी एनडीए की ओर से पूर्व उपसभापति हरिवंश का नाम लगभग तय माना जा रहा है. हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, जिसके साथ ही यह पद रिक्त हो गया था. लेकिन अगले ही दिन, 10 अप्रैल को उन्हें मनोनीत सदस्य के रूप में राज्यसभा भेजने की अधिसूचना जारी कर दी गई. हरिवंश के लंबे अनुभव और सरकार के साथ उनके बेहतर तालमेल को देखते हुए उन्हें एक बार फिर इस जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है.

हरिवंश राज्यसभा में अपने तीसरे कार्यकाल की पारी शुरू कर रहे हैं, वहीं प्रो. मनोज झा का यह सदन में दूसरा कार्यकाल है. मनोज झा को उनकी विद्वत्ता और तार्किक भाषणों के लिए जाना जाता है, जबकि हरिवंश को उनकी प्रशासनिक पकड़ के लिए सराहा जाता है.

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