रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 'मिशन जर्मनी', एजेंडे में 80,000 करोड़ की डील, जान लीजिए क्यों है ये खास

रक्षा मंत्री का यह दौरा  साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन जैसे नए क्षेत्रों पर भी फोकस रहेगा. इस दौरान कुछ बड़े समझौते भी हो सकते हैं. रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार किया जा सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
जर्मनी के दौरे पर जाएंगे राजनाथ सिंह
NDTV
नई दिल्ली:

भारत की रक्षा कूटनीति के लिए अप्रैल का ये हफ़्ता ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है.7 साल के लंबे अंतराल के बाद, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बर्लिन की सरज़मीं पर कदम रखेंगे, तो एजेंडा सिर्फ़ द्विपक्षीय बातचीत नहीं बल्कि हिंद महासागर में भारत की धमक को कई गुना बढ़ाने का होगा.जर्मनी की बेमिसाल इंजीनियरिंग और भारत की सामरिक महत्वाकांक्षाएं जब मिलेंगी, तो भारत की ताक़त एक नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगी.

जर्मनी के 3 दिन के दौरे पर जाएंगे रक्षा मंत्री . राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी  का दौरा करेंगे. यह दौरा तीन दिन का होगा. इसका मकसद भारत और जर्मनी के रक्षा संबंधों को और मजबूत करना है. संभावना है कि इस दौरान पनडुब्बी सौदे पर मुहर लग सकती हैं . दौरे के दौरान रक्षा मंत्री जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात करेंगे. वे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. अपनी इस यात्रा में  रक्षा मंत्री जर्मनी के कई वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे. बैठकों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा. यह दौरा भारत और जर्मनी के रक्षा रिश्तों के लिए अहम माना जा रहा हैं.

रक्षा मंत्री की इस यात्रा में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करने की बात होगी. इस दौरान भारत और जर्मनी के बीच छह पनडुब्बी को लेकर बात हो सकती है. इस डील की कुल कीमत करीब 80 हजार करोड़ की बताई जा रही हैं. इसके तहत भारतीय नौसेना को 6 नई पनडुब्बियां मिलेंगी. इन पनडुब्बियों में एडवांस AIP यानि कि एयर  इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन तकनीक होगी. इससे वे दो  से तीन  हफ्ते तक पानी के अंदर रह सकेंगी. जबकि समान्य सबमरीन को एक या दो दिन में पानी के बाहर आना पड़ता हैं . इससे दुश्मन के लिए इन्हें पकड़ना काफी मुश्किल होगा. इस सौदे में जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स की अहम भूमिका मानी जा रही है. भारत में  पनडुब्बियां इसी कंपनी के डिजाइन पर बन सकती हैं.

इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिलेगी. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी इस डील का हिस्सा होगा. इससे भारत को नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा. इन पनडुब्बियों में आधुनिक हथियार होंगे. इसमें आधुनिक टॉरपीडो और ब्रहोम्स जैसी मिसाइलें लगाई जा सकेंगी. ये दुश्मन पर छिपकर नजर रखेगी और साथ ही दुश्मन के युद्धपोतों और जमीनी लक्ष्यों पर सटीक नि्शाना साधेगी . 

साथ ही रक्षा मंत्री का यह दौरा  साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन जैसे नए क्षेत्रों पर भी फोकस रहेगा. इस दौरान कुछ बड़े समझौते भी हो सकते हैं. रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार किया जा सकता है. यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन की ट्रेनिंग में सहयोग का समझौता भी हो सकता है. ये समझौते दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई दिशा देंगे. यह दौरा चल रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मौका देगा. दोनों देश पुराने समझौतों की प्रगति देखेंगे. साथ ही नए सहयोग के रास्ते भी तलाशेंगे.

Advertisement
रक्षा मंत्री वहां पर जर्मनी की बड़ी रक्षा कंपनियों से भी मिलेंगे. इसका उद्देश्य भारत में संयुक्त निर्माण को बढ़ावा देना है.भारत के रक्षा मंत्री का जर्मनी दौरा सात साल बाद हो रहा है. इससे पहले 2019 में तात्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण जर्मनी गई थीं. वहीं बोरिस पिस्टोरियस  जून 2023 में भारत आए थे. तब उनकी राजनाथ सिंह  के साथ लंबी बातचीत हुई थी.

वैसे भारत और जर्मनी के बीच मजबूत रणनीतिक  रक्षा साझेदारी है. दोनों देश लोकतंत्र और कानून के शासन में विश्वास रखते हैं. हाल के वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग इस रिश्ते का अहम हिस्सा बना है. इस दौरे का उद्देश्य रिश्तों को और गहरा करना है. रक्षा मंत्री का यह दौरा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है.

यह भी पढ़ें: राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता: राजनाथ सिंह

Featured Video Of The Day
US Government Iran War पर Daily $500 Million फूंक रही? Zohran Mamdani का Trump से तीखा सवाल
Topics mentioned in this article