Rajasthan News: राजस्थान में मानसून (Monsoon) की एंट्री से ठीक पहले कोटा नगर निगम (Nagar Nigam Kota) एक्शन मोड में आ गया है. अधिकारियों ने शहर में सर्वे करने के बाद करीब 100 जर्जर इमारतों को चिन्हित किया है, जिनके बारिश के मौसम में गिरने से भारी नुकसान होने की संभावना है. ऐसी सभी बिल्डिंग के मालिकों को नगर निगम ने नोटिस जारी कर 3, 7 और 15 दिनों का समय दिया गया है. इस नोटिस में लिखा है कि तय समय के अंदर वे स्वयं अपनी बिल्डिंग को ठीक करवा लें अथवा गिरवा दें. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो नगर निगम की टीम बुलडोजर से उनकी जर्जर इमारत को गिरा देगी और फिर इस अभियान का खर्च भी मकान मालिक से वसूलेगी.
'3 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा'
कोटा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की डिप्टी कमिश्नर दयावती सैनी से जब इस बार में बात की गई तो उन्होंने NDTV को बताया कि नोटिस में दी गई समय सीमा खत्म होने के बाद 3 अतिरिक्त दिन का समय मकान मालिक को दिया जाता है. अगर उसके बाद भी वो स्वयं से कोई कार्रवाई नहीं करता है तो निगम की टीम जाकर उसके जर्जर भवन को गिरा सकती है.
झाला हाउस को गिराने के नोटिस पर विवाद
नगर निगम के इस एक्शन की जानकारी जैसे ही पूर्व मंत्री और विधायक शांति धारीवाल तक पहुंची, तो उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करते हुए इस पर सवाल उठा दिए. उनका कहना है कि KMC ने कोटा की प्राचीन इमारत झाला हाउस को गिराने के लिए अपनी लिस्ट में शामिल किया है. ऐसी पुरानी और ऐतिहासिक इमारतें हमारी धरोहर हैं. यदि भवन का कोई हिस्सा जर्जर है तो केवल उसी हिस्से को हटाया जाए, जबकि सुरक्षित हिस्से को संरक्षित कर उसका रिनोवेशन कराया जाना चाहिए.
शांति धारीवाल
राजस्थान में मानसून कब आएगा 2026?
भारत मौसम विज्ञान विभाग के जयपुर केंद्र (IMD Jaipur) ने एक अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि इस बार राजस्थान में मानसून की एंट्री देरी से होगी, और अल-नीनो के कारण बारिश भी सामान्य से कम होने के आसार हैं. अलर्ट के मुताबिक, जून के आखिरी हफ्ते में दस्तक देने वाले मानसून का असर इस बार जुलाई के पहले हफ्ते में दक्षिणी राजस्थान में दिखेगा, जिसकी वजह से उन इलाकों में बारिश थोड़ी बढ़ सकती है.
खरीफ की फसल पर खतरा
चिंताजनक बात यह है कि केंद्र सरकार ने देश के उन 12 राज्यों की पहचान की है, जहां कमजोर मानसून के कारण खरीफ की फसलों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है. इन राज्यों में राजस्थान भी शामिल है, जहां कम बारिश के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है. सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक फसलों की योजना तैयार की है ताकि किसानों को कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिल सके.
35 जिलों में 70 विशेष बचाव दल तैनात
हालांकि, कमजोर बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद, अचानक होने वाली भारी बारिश और जलभराव जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने पूरी तैयारी कर ली है. राजस्थान के 35 जिलों में 70 विशेष बचाव दल तैनात किए गए हैं. सबसे ज्यादा 8 टीमें जयपुर में, 7 भरतपुर में और 6 कोटा में लगाई गई हैं. इन सभी टीमों को मोटरबोट, लाइफ जैकेट और गहरे पानी में जाने वाले उपकरणों से लैस किया गया है ताकि किसी भी आपदा के समय तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके.
IMD के मुताबिक, 26 जून से 9 जुलाई तक प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में बारिश सामान्य से कम ही रहने वाली है. दूसरे हफ्ते में पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में बारिश थोड़ी बढ़ सकती है. तापमान की बात करें तो फलोदी 41.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा है. वहीं जयपुर में 16.4 मिलीमीटर, बीकानेर के लूणकरणसर में 12.5 मिलीमीटर और कोटा में 4.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है.
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