राजनीति की ‘ग्रिप’ दिखती नहीं है... मार्शल आर्ट में दिख जाती है, संसद में राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा?

राहुल गांधी ने संसद में मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में भी “ग्रिप” होती है, लेकिन वह दिखाई नहीं देती.

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  • राहुल गांधी ने बजट सत्र में राजनीतिक रणनीति समझाने के लिए मार्शल आर्ट का उदाहरण दिया
  • राहुल गांधी ने कहा कि जूडो में ग्रिप पकड़ बनाने की प्रक्रिया है लेकिन राजनीति में भी 'ग्रिप' बनायी जाती है
  • राहुल गांधी ने बताया कि राजनीति में पकड़ दिखती नहीं, लेकिन वह नियंत्रण और फैसलों के लिए अहम होती है
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बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने राजनीति को समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने अपने भाषण में मार्शल आर्ट का ज़िक्र किया और कहा कि जिस तरह खेल में “ग्रिप” और “चोप” होती है, राजनीति में भी कई चीजें इसी तरह काम करती हैं बस फर्क इतना है कि राजनीति में यह सब दिखता नहीं है.

राहुल गांधी ने कहा कि वे खुद मार्शल आर्ट करते हैं और भारत में आज बहुत लोग अलग-अलग तरह की मार्शल आर्ट सीख रहे हैं. उन्होंने जूडो का उदाहरण देते हुए कहा कि इस कला की बुनियाद “ग्रिप” है. खिलाड़ी पहले पकड़ बनाता है, फिर उसी पकड़ के सहारे अगला मूव करता है. उनके मुताबिक, जब किसी के हाथ में ग्रिप आ जाती है, तो सामने वाले को लगता है कि उसे काबू कर लिया गया है.

उन्होंने इसे राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि कई बार राजनीति में भी “ग्रिप” होती है  यानी नियंत्रण, रणनीति या पकड़  लेकिन यह आम लोगों को दिखाई नहीं देती. उनके शब्दों में, “ग्रिप राजनीति में होती है, बिज़नेस में भी होती है. मार्शल आर्ट में ग्रिप दिखती है, लेकिन राजनीति में नहीं दिखती कि चोट कहां लगी है और किसने पकड़ा हुआ है.”

ग्रिप बनाकर राजनीतिक निर्णय को प्रभावित किया जाता है: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आगे कहा कि जूडो में ग्रिप से चोप और चोप से टैप तक की एक प्रक्रिया होती है. राजनीति और बिजनेस में भी कई फैसले इसी तरह की रणनीति से होते हैं, जहां शुरुआत की पकड़ बाद के बड़े निर्णयों को प्रभावित करती है. हालांकि, उन्होंने किसी नेता, दल या नीति का सीधा उल्लेख नहीं किया.

सदन में उनके इस उदाहरण को विपक्षी सदस्यों ने ध्यान से सुना, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे लेकर अपनी आपत्तियां जताईं. लेकिन भाषण का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा, क्योंकि राहुल गांधी ने इसे एक अलग तरीके से राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी के रूप में पेश किया.

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