राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता पर हाई कोर्ट का फैसला और इंडियन स्टेट बयान विवाद, क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?

कर्नाटक के बीजेपी नेता विग्नेश शिशिर की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट फैसला सुनाने जा रहा है. आरोप है कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी है, जिसे लेकर एफआईआर की मांग की गई थी.

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  • राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता के मामले की शुरुआत विग्नेश शिशिर की याचिका से हुई.
  • उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी है.
  • अदालत ने अब तक यह नहीं कहा है कि राहुल गांधी दोषी हैं या नहीं. मामला सिर्फ इतना है कि जांच शुरू हो या नहीं.
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राहुल गांधी इस वक्त दो अलग अलग कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं. दोनों ही मामले इलाहाबाद हाई कोर्ट में पहुंचे हैं. एक मामला है दोहरी नागरिकता का, जिस पर आज हाई कोर्ट का फैसला आना है. दूसरा मामला जुड़ा है कानून, राजनीति और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे बड़े सवालों से. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये दोनों मामले क्या हैं, कैसे शुरू हुए और अब तक क्या हुआ.

दोहरी नागरिकता के मामले में अब तक क्या हुआ?

इस मामले की शुरुआत विग्नेश शिशिर की याचिका से हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी है. 

भारत में कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता. अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो वह किसी और देश की नागरिकता नहीं रख सकता. राहुल गांधी सांसद हैं, ऐसे में यह और गंभीर मामला बन जाता है.

शिशिर ने दावा किया कि राहुल गांधी के पास दो पासपोर्ट हो सकते हैं. यह इंडियन पासपोर्ट ऐक्ट का उल्लंघन हो सकता है, साथ ही फॉरेनर्स ऐक्ट और ऑफिसियल सीक्रेट्स ऐक्ट के तहत भी मामला बन सकता है.

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सबसे पहले रायबरेली की ट्रायल कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई. कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और याचिका खारिज कर दी.

इसके बाद शिशिर ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. अब हाईकोर्ट तय करेगा कि क्या एफआईआर दर्ज होनी चाहिए या नहीं. 

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यानी अभी तक अदालत ने यह नहीं कहा है कि राहुल गांधी दोषी हैं या नहीं. मामला सिर्फ इतना है कि जांच शुरू हो या नहीं.

इंडियन स्टेट बयान विवाद क्या है?

दूसरा मामला राहुल गांधी के एक बयान से जुड़ा है. 15 जनवरी 2025 को उन्होंने कांग्रेस के नए मुख्यालय इंदिरा भवन के उद्घाटन के दौरान कहा था कि उनकी लड़ाई सिर्फ बीजेपी और आरएसएस से नहीं, बल्कि इंडियन स्टेट से भी है. 

इस बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ और यह आरोप लगाया गया कि यह बयान देश की संस्थाओं पर सवाल उठाता है. इस मामले में याचिका सिमरन गुप्ता ने दाखिल की.

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पहले चंदौसी की अदालत में एफआईआर की मांग की गई. अदालत ने इस याचिका को कमजोर बताते हुए खारिज कर दिया. इसके खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. 

दोनों मामलों में समान बात क्या है?

इन दोनों मामलों में कुछ चीजें समान हैं. दोनों में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई. दोनों मामलों में निचली अदालत ने याचिकाएं खारिज कर दीं. दोनों फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. अब अंतिम फैसला हाईकोर्ट को करना है.

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कानूनी रूप से ये मामले क्यों अहम हैं?

इसमें सबसे अहम नागरिकता का सवाल है. अगर दोहरी नागरिकता का आरोप सही साबित होता है, तो यह सीधे सांसद की पात्रता को प्रभावित कर सकता है. वहीं इंडियन स्टेट वाला मामला यह तय करेगा कि एक नेता अपनी राजनीतिक आलोचना में कितनी दूर तक जा सकता है.

इसमें अदालत की भूमिका भी तय होगी. क्या अदालत ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर का आदेश दे या पहले ठोस सबूत मांगे, यह भी तय होगा.

ऐसे में अगर हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखता है, तो राहुल गांधी को दोनों मामलों में राहत मिल सकती है. वहीं अगर हाईकोर्ट आदेश पलटता है तो एफआईआर और जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

कुल मिलाकर, राहुल गांधी के खिलाफ फिलहाल कोई दोष साबित नहीं हुआ है और मामला अभी इतना है कि क्या आरोप इतने मजबूत हैं कि जांच शुरू की जा सकती है या अदालत मानती है कि यह राजनीतिक आरोप हैं जिनमें पर्याप्त आधार नहीं है.

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