रेस के घोड़े और बारात के घोड़े को अलग करना होगा... राहुल गांधी के इस बयान का आखिर क्या है मतलब? समझें

राहुल गांधी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम लंगड़े घोड़े को अलग करें. ऐसे कार्यकर्ता अगर बांकी घोड़ों यानी कार्यकर्ताओं को तंग करेंगे तो उनपर कार्रवाई होगी. 

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर की बड़ी टिप्पणी

लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी का एक बयान इन दिनों खूब चर्चाएं बंटोर रहा है. राहुल गांधी ने ये बयान मंगलवार को भोपाल में दिया है. इस बयान में उन्होंने कहा कि पार्टी में कई ऐसे कार्यकर्ता हैं जो पूरी ताकत के साथ पार्टी के लिए काम करते हैं. जबकि ऐसे भी कई कार्यकर्ता हैं जो अब थक चुके हैं.ऐसा लग रहा है कि वह रेस में थक चुके हैं. ऐसे में अब समय आ गया है कि रेस के घोडे़ और बारात के घोड़े को अलग करना पड़ेगा. 

राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं पहले कहा करता था कि दो टाइप के घोड़े हैं लेकिन अब मैं ये मानता हूं कि दो नहीं बल्कि तीन टाइप के घोड़े हैं. एक रेस का घोड़ा, एक बारात का घोड़ा और तीसरा लंगड़ा घोड़ा. अब समय आ गया है कि हम लंगड़े घोड़े को अलग करें. ऐसे कार्यकर्ता अगर बांकी घोड़ों यानी कार्यकर्ताओं को तंग करेंगे तो उनपर कार्रवाई होगी. 

विचारधारा के कार्यकर्ताओं और नेताओं की कमी नहीं

राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश में विचारधारा के कार्यकर्ताओं और नेताओं की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि हम जिस कमरे में बैठे हैं उसी कमरे में ऐसे कई कार्यकर्ता हैं जो बीजेपी को हराने का टैलेंट रखते हैं. लेकिन मुझे पता है कि आपके हाथ बंधे हुए हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि आपकी आवाज संगठन में ठीक से सुनाई नहीं देती है. 

Featured Video Of The Day
NDTV Davos Coverage: India बना Global AI Power? | Rahul Kanwal | Ashwini Vaishnaw | NDTV India
Topics mentioned in this article