भारतीय वायुसेना अब फ्रांस से 114 रफाल लड़ाकू विमान खऱीदने की तैयारी में हैं . इस सौदे को रक्षा खरीद बोर्ड ने मंजूरी दे ही हैं . अब इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाले रक्षा अधिग्रहण परिषद और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले कैबिनेट कमेटी ऑऩ सिक्युरिटी से मंजूरी मिलने के बाद रफाल खऱीदने का रास्ता साफ हो जाएगा . लेकिन इस भारी भरकम सौदे के बाद भी वायुसेना को पांचवी पीढ़ी का एयरकाफ्ट चाहिए . वायुसेना के सूत्रों का कहना है कि हर लड़ाकू विमान का रोल अलग अलग होता है लिहाजा जो काम पांचवी पीढ़ी का एयरकाफ्ट कर सकता है वह काम 4.5 पीढ़ी का रफाल नही कर सकता है . खासकर उस हालात में तो चिंता और भी बढ़ जाती है जब आपके प्रतिदंद्वी के पास जल्द ही पांचवी पीढ़ी के फाइटर मिलने वाले है .
यह बात किसी से छुपी नही है कि इन दिनों वायुसेना इस समय एक कठिन दौर से गुजर रही है. उसके पास लड़ाकू विमानों की भयंकर कमी है . एक ओर चीन और पाकिस्तान लगातार अपने फाइटर की तदाद में इजाफा कर रहे है तो दूसरी ओर भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की संख्या लगातार घट रही है. आज वायुसेना के पास लगभग 29 स्क्वाड्रन ही बचे हैं . वायुसेना को पास लड़ाकू विमानों की कम से कम 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए . देसी फाइटर तेजस मार्क 1 ए कब तक वायुसेना को मिल पायेंगे ? इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नही हैं. वही तेजस मार्क 2 को तो और भी कुछ अता पता भी नही हैं वह वायुसेना को कब तक मिल पायेगा ? पुराने में से मिग-21, मिग-27 और पुराने जगुआर रिटायर हो चुके हैं . आने वाले सालों में मिराज-2000 भी सेवा से बाहर होंगे .
चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली मौजूदा चुनौतियों का सामना करने के लिये ही वायुसेना रफाल खरीदने की तैयारी में हैं .रफाल एक बेहतरीन 4.5 जनरेशन फाइटर जेट है. इसमें आधुनिक रडार, लंबी दूरी तक मार करने वाले मिटिओर और स्कल्प जैसी मिसाइलों के साथ शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम है. लेकिन यह विमान पूरी तरह स्टेल्थ नही है.चीन के पास अब छठवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान आ गए है . चीन की मदद से जल्द ही पाकिस्तान के पास भी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिल जायेंगे .
इस हालात में भारतीय वायुसेना को अगर पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान खरीदना हो तो फिलहाल सुखोई 57 से बेहतर कोई विकल्प नही हैं . अमेरिका भारत को अपनी पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान एफ 35 से बेचने नही जा रहा है अगर भारत खरीदता भी है तो यह काफी मंहगा डील होगा . चीन का तो सवाल ही नही उठता कि वह भारत को अपना पांचवी पीढ़ी का फाइटर बेचे या फिर भारत चीन से लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला करें. सुखोई 57 अपने स्टील्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे और लंबी रेंज के क्षमता के कारण दुश्मन के इलाके में चुपचाप घुसकर अहम ठिकानों पर हमला कर सकता है.
भारतीय वायुसेना सुखोई -57 को रफाल का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक मानती है. रफाल मल्टी-रोल मिशन करेगा, जबकि सुखोई -57 का इस्तेमाल डे-वन स्ट्राइक और हाई-वैल्यू टारगेट्स के लिए होगा. जानकारी के मुताबिक रूस भारत को सुखोई -57 के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सोर्स कोड एक्सेस और भारत में निर्माण का प्रस्ताव भी दे रहा है. हालांकि इंजन की परिपक्वता और पश्चिमी प्रतिबंध जैसी चुनौतियां मौजूद हैं.
असल में वायुसेना को आधुनिक दौर की सबसे मारक सेनाओं में बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वह न केवल तकनीकी संपन्न हो बल्कि सटीक मारक के साथ दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने में भी सक्षम हो इसलिए रफाल,तेजस जैसे तमाम आधुनिक बेड़े के साथ पांचवी पीढ़ी का आधुनिकतम विमान भी जरूरी है तभी शक्ति संतुलन बनेगा. यह देश की सुरक्षा के साथ साथ आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी है.
यह भी पढ़ें: फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने को हरी झंडी, 2016 से भी सस्ता होगा सौदा! ये शर्त भी रहेगी
यह भी पढ़ें: एयरफोर्स को मिलेगा बड़ा बूस्ट: भारत में बनेंगे 114 राफेल फाइटर जेट, रक्षा मंत्रालय कर रही है मेगा डील पर चर्चा














