पंजाब चुनाव: होने वाला है बीजेपी-अकाली गठबंधन, इस 'रणनीति' पर लगी मुहर

सूत्रों के अनुसार बीजेपी अगले साल की शुरुआत में होने वाला विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में लड़ेगी. दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत का एक दौर पूरा हो चुका है.

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पंजाब चुनाव
NDTV

पश्चिम बंगाल की जीत से उत्साहित होकर बीजेपी ने विपक्ष के शासन वाले दूसरे राज्य पंजाब में पूरी ताकत लगाने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार बीजेपी अगले साल की शुरुआत में होने वाला विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में लड़ेगी. दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत का एक दौर पूरा हो चुका है. जल्दी ही दूसरे दौर की बातचीत होगी जिसमें सीटों की संख्या और पहचान पर चर्चा की जाएगी.

बीजेपी क्या कह रही है?

बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस गठबंधन से दोनों दलों को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है. यह गठबंधन भाईचारे को भी मजबूत करता है. बीजेपी नेताओं का आकलन है कि दोनों दलों के साथ आने पर राज्य में होने वाले चतुर्कोणीय मुकाबले में जीत की संभावना बढ़ जाएगी. इसके लिए उन्हें अपने जनाधार में बढोत्तरी करनी होगी.

आंकड़ों में गठबंधन की ताकत

वे इस दावे के समर्थन में पिछले लोक सभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं जब बीजेपी और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. बीजेपी राज्य की 13 लोक सभा सीटों में से कोई सीट नहीं जीत सकी थी लेकिन उसे 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे एक सीट पर जीत मिली थी. इस तरह दोनों दलों के मिला कर करीब 32 प्रतिशत वोट हैं. इसमें कुछ अतिरिक्त वोट जुड़ने पर यह गठबंधन सत्तारूढ आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दे सकता है जो बीजेपी नेताओं के अनुसार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है.

वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य की 117 में से अकाली दल को केवल 3 सीटों पर जीत मिली थी और उसे 18.38 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं बीजेपी को केवल 6.60 प्रतिशत वोट मिले थे और उसे दो सीटों पर जीत मिली थी. यानी बीजेपी ने विधानसभा चुनाव की तुलना में लोक सभा चुनाव में अपने वोटों में करीब तीन गुना बढोत्तरी की थी. यही कारण है कि इस बार गठबंधन होने पर बीजेपी पिछली बार की तुलना में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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पिछले चुनावों का ट्रेंड

लोक सभा चुनाव में बीजेपी 23 विधानसभा सीटों पर आगे रही और शिरोमणि अकाली दल 9 सीटों पर. इसी तरह बीजेपी करीब 17 सीटों पर दूसरे नंबर पर और अकाली दल 14 विधानसभा सीटों पर दूसरे स्थान पर रहा.  पांच सीटों पर बीजेपी की हार पांच हजार वोटों से कम और दस सीटों पर दस हजार वोटों से कम रही.  इस तरह बीजेपी ने राज्य की 38 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर मजबूत स्थिति दिखाई थी.

इस तरह आकलन है कि अगर दोनों दल मिल कर लड़ें तो और मजबूत स्थिति में आ सकते हैं. गौरतलब है कि दोनों दलों के बीच 1996 से 2020 तक गठबंधन रहा. 1997 में इस गठबंधन को प्रचंड विजय मिली थी. तब अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं. 2007 में भी इस गठबंधन को जीत मिली थी. तब अकाली दल ने 49 और बीजेपी ने 19 सीटें जीती थीं. 2012 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर इतिहास रचा था. तब अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में यह गठबंधन एक बार फिर कागज पर मजबूत दिखाई दे रहा है.

बीजेपी की रणनीति

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बीजेपी सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार पर भ्रष्टाचार, शासन की विफलता और वादों से पलटने के गंभीर आरोप लगा कर चुनाव मैदान में उतर रही है. इसके साथ ही, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पंजाब को दी गई आर्थिक सहायता और योजनाओं का भी उल्लेख किया जाएगा. बीजेपी राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए रोजगार केंद्रित मॉडल और पंथिक/सामाजिक विश्वास-बहाली का एक व्यापक विज़न डॉक्यूमेंट भी ला सकती है.

बीजेपी के मुताबिक भ्रष्टाचार से लड़ने का वादा कर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी इसमें विफल रही है. पिछले वर्ष 144 सरकारी अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया गया. जबकि 2025 में रिश्वतखोरी के जाल में 43 पंजाब पुलिसकर्मी पकड़े गए. भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण कैबिनेट मंत्री विजय सिंगला को बर्खास्त करना पड़ा, जबकि विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में विधायक रमन अरोड़ा पर भी छापेमारी की. साथ ही यह दावा किया गया है कि दिल्ली में बैठा वरिष्ठ नेतृत्व पंजाब के सरकारी कार्यों को नियंत्रित कर रहा है और ठेकेदारों से अनुचित लाभ ले रहा है.

आप को घेरने की क्या तैयारी?

बीजेपी राज्य सरकार पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय में विफलता का भी आरोप लगा रही है. बीजेपी के मुताबिक पंजाब में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.5% दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत (0.3%) से काफी अधिक है. पंजाब के 3,699 स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 52.5% केंद्र ही 'भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों'  पर खरे उतरते हैं. केवल 4.3% जिला अस्पताल और 4.9% सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) निर्धारित राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं. पीएचसी (PHC) में से केवल 15.7% मानक पर हैं. 'शिक्षा मॉडल' के प्रचार के बावजूद, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद 60% तक हैं. राज्य में 16 मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का वादा किया गया था, लेकिन एक भी स्थापित नहीं हुआ.

बीजेपी के मुताबिक केंद्र सरकार ने पंजाब को भरपूर वित्तीय समर्थन दिया है. पीएम-किसान के तहत 18,08,771 किसान लाभार्थियों को ₹7,596.84 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई. मनरेगा में 8,14,411 लाख कार्यदिवस सृजित करने और ग्रामीण विकास के लिए ₹8,144.11 करोड़ दिए गए. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 65,370.51 किमी ग्रामीण सड़कों और 415 पुलों के निर्माण के लिए ₹1,722.68 करोड़ दिए गए. स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए ₹359.56 करोड़ की राशि दी गई. जल जीवन मिशन में 32,36,691 घरों को नल से जल कनेक्शन दिया गया. अमृत सरोवर मिशन के तहत जल निकायों के कायाकल्प के तहत 816 अमृत सरोवर विकसित किए गए. साथ ही रेलवे और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने मदद दी.

बीजेपी के क्या होंगे चुनावी वादे?

बीजेपी कई चुनावों वादों पर भी विचार कर रही है. पार्टी पंजाब की अर्थव्यवस्था को फ्रीबीज से हटा कर रोजगार और संपत्ति सृजन की ओर ले जाने की योजनाओं पर विचार कर रही है. महिलाओं को आर्थिक मदद दी जा सकती है. साथ ही, राज्य में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का भी ऐलान हो सकता है.

इस तरह जहां एक तरफ आप सरकार के दावों की पोल खोलने की कोशिश की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ पंजाब की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और पंथिक सरोकारों को साधते हुए एक वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल पेश करने की रणनीति बनाई गई है.
 

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