एलओसी के पास 20 अप्रैल से 24 अप्रैल तक मॉक ड्रिल, पुंछ में फिर डर का माहौल

एलओसी से सटे जम्मू के पुंछ जिले में मॉक ड्रिल की घोषणा के बाद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. 20 से 24 अप्रैल तक होने वाले इस अभ्यास में हवाई हमले और ब्लैकआउट जैसी स्थितियों का अभ्यास किया जाएगा, जबकि प्रशासन इसे केवल तैयारियों का हिस्सा बता रहा है.

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  • जम्मू के पुंछ जिले में 20 से 24 अप्रैल तक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें आपातकालीन स्थिति का अभ्यास होगा
  • मॉक ड्रिल के दौरान हवाई हमले, ब्लैकआउट, सायरन बजाने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का अभ्यास शामिल होगा
  • पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा, एसडीआरएफ, फायर सर्विस समेत कई एजेंसियां अभ्यास में सहयोग करेंगी
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एलओसी के पास रहने वाले लोगों के बीच एक बार फिर डर का माहौल बनने लगा है. मॉक ड्रिल की घोषणा के साथ ही उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि पिछले साल हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की यादें अब भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा हैं. उस दौरान इलाके में लंबे समय तक तनाव और खतरे की स्थिति बनी रही थी, जिसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग आज तक भूल नहीं पाए हैं. जम्मू के पुंछ प्रशासन ने 20 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक जिले में मॉक ड्रिल आयोजित करने का फैसला लिया है.

इस दौरान हवाई हमले और ब्लैकआउट जैसी आपात स्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाएगा. प्रशासन का कहना है कि यह केवल तैयारियों का हिस्सा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सही प्रतिक्रिया देना सिखाया जा सके, और घबराने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, जमीनी हालात इससे अलग दिखाई दे रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग अब भी सहमे हुए हैं और पुराने अनुभवों के चलते मानसिक तनाव में हैं. ड्रिल के दौरान सायरन बजेंगे, कुछ समय के लिए बिजली बंद की जा सकती है, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का अभ्यास कराया जाएगा, जिसे लेकर लोगों में आशंका बनी हुई है.

इस मॉक ड्रिल में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा, एसडीआरएफ, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करेंगी. प्रशासन ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ सतर्क रहते हुए काम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि अभ्यास प्रभावी ढंग से पूरा हो सके और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो. साथ ही प्रशासन लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है, ताकि वे यह समझ सकें कि यह सिर्फ एक अभ्यास है. ड्रिल के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और भविष्य की तैयारियों को और बेहतर बनाने के लिए इसका मूल्यांकन किया जाएगा. फिलहाल, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के मन में डर बना हुआ है और वे शांति की उम्मीद के साथ सतर्क रहने को मजबूर हैं.
 

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