- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया
- पीएम मोदी ने कहा कि अजित पवार ने महाराष्ट्र और देश के विकास में विशेष योगदान दिया था
- पीएम मोदी ने अजित पवार के परिवार के प्रति संवेदना जताई और हादसे में मारे गए अन्य साथियों को याद किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर एक बार फिर दुख जताया है. दिल्ली में करियप्पा ग्राउंड में एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए पीएम मोदी भावुक भी हो गए. उन्होंने कहा कि आज का दिन बड़ा दुख लेकर आया है. इसने हमारे कुछ साथियों को हमसे छीन लिया है. पीएम मोदी ने अजित पवार को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश और महाराष्ट्र के विकास में बड़ा योगदान दिया था.
रैली की शुरुआत में पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा, 'आज का दिन हमारे लिए एक बड़ा दुख लेकर भी आया है. आज सुबह ही महाराष्ट्र में दुखद विमान दुर्घटना हुई. इस दुर्घटना ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार जी और कुछ साथियों को हमसे छीन लिया है.'
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'अजित दादा ने महाराष्ट्र और देश के विकास में अपना बड़ा योगदान दिया. विशेष रूप से गांवों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने हमेशा आगे बढ़कर काम किया है. मैं अजित पवार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं. जिन साथियों को हमने इस हादसे में खोया है. इस पीड़ा की घड़ी में हम सभी उनके परिजनों के साथ हैं.'
युवाओं से क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने एनसीसी कैडेट्स से कहा कि आज का समय भारत के युवाओं का है. उन्होंने कहा, 'हमारे युवाओं के लिए ये सबसे ज्यादा अवसर वाला समय है. इस कालखंड का सबसे ज्यादा लाभ हमारे युवाओं को मिलेगा. इसका एक उदाहरण आपने कल देखा. भारत और ईयू के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बनी. इससे पहले ओमान, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और मॉरिशस जैसे देशों के साथ भी भारत ने समझौता किया. ये सारे एग्रीमेंट हमारे लाखों करोड़ों नौजवानों के लिए अनगिनत अवसर बनाने वाले हैं.'
उन्होंने आगे कहा कि 'आज पूरी दुनिया युवा भारत के युवाओं की तरफ बहुत भरोसे से देख रही है. भारत के युवाओं के पास लोकतंत्र के संस्कार हैं. हमारे युवाओं के पास हर प्रकार की वविधता को सम्मान देने संस्कार हैं. भारत के युवाओं के पास पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के संस्कार हैं. और इसीलिए भारत के युवा कहीं भी जाते हैं तो देश के लोगों के साथ आसानी से घुल मिल जाते हैं. हम अपने सामर्थ्य से उस देश के विकास में मदद करते हैं. यही हमारे संस्कार हैं. ये हमारा स्वभाव है. मातृभूमि के अपार श्रद्धा और कर्मभूमि के प्रति असीम समर्पण.'














